बंगाल की धरती से मिटेंगे मुगलों और अंग्रेजों के नाम, CM शुभेंदु अधिकारी ने बनाई 'नाम समीक्षा समिति'
कोलकाता (जागरण न्यूज): पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी एक्शन मोड में आ गए हैं। 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के महज डेढ़ महीने के भीतर उन्होंने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। बंगाल में अब उन सभी जगहों, सड़कों और इमारतों के नाम बदले जाएंगे, जो मुगलों, पठानों या दमनकारी अंग्रेजों के नाम पर रखे गए हैं।
इस बड़े फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य सरकार ने 'नाम समीक्षा समिति' का गठन किया है।
समिति की कमान कार्तिक महाराज के हाथों में
इस महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष पद्मश्री से सम्मानित स्वामी प्रदीप्तानंद जी महाराज (जिन्हें कार्तिक महाराज के नाम से भी जाना जाता है) को बनाया गया है। यह समिति पूरे राज्य में उन जगहों की पहचान करेगी जिनके नाम विदेशी आक्रांताओं या देश विरोधियों के नाम पर हैं, और उन्हें महापुरुषों या असली देशभक्तों के नाम पर रखने का प्रस्ताव देगी।
शुरुआत: सूरावर्दी एवन्यू अब हुआ 'गोपाल मुखर्जी रोड'
नाम बदलने की इस मुहिम की शुरुआत कोलकाता से हो चुकी है। शहर के मशहूर 'सूरावर्दी एवन्यू' का नाम तत्काल प्रभाव से बदलकर 'गोपाल मुखर्जी रोड' कर दिया गया है।
विधानसभा में CM की दो टूक:
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि "कोलकाता या बंगाल की धरती पर मुगलों, पठानों या दमनकारी अंग्रेजों के नाम अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। अब राज्य की हर जगह सिर्फ हमारे असली देशभक्तों और महापुरुषों के नाम पर होगी।"
विपक्ष ने बताया इतिहास से छेड़छाड़
इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। जहाँ एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय जैसे लोग, जो लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर 'नाम आयोग' बनाने की मांग कर रहे थे, इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं; वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे सीधे तौर पर 'इतिहास से छेड़छाड़' बता रहा है। हालांकि, सरकार का सख्त रुख है कि यह सिर्फ बंगाल के खोए हुए असली गौरव को वापस लाने की एक अहम शुरुआत है।