चकाई (जमुई)। संत आसाराम बापू प्रकरण को लेकर संत समाज की ओर से एक बार फिर आवाज उठी है। महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज ने चकाई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आसाराम बापू की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलने की उम्मीद है। उन्होंने जोधपुर उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय पर निराशा व्यक्त की और कहा कि संत समाज इस फैसले से संतुष्ट नहीं है।
संत समाज में नाराजगी
स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज ने कहा कि आसाराम बापू के विरुद्ध दर्ज मामले को लेकर संत समाज लंबे समय से अपनी आपत्तियां और शंकाएं व्यक्त करता रहा है। उनका कहना था कि संत समाज का मानना है कि मामले के विभिन्न पहलुओं पर अभी भी गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जोधपुर उच्च न्यायालय के फैसले से देश-विदेश में उनके समर्थकों और संत समाज को गहरा आघात पहुंचा है।
धर्मांतरण रोकने के कार्यों का किया उल्लेख
महामंडलेश्वर ने कहा कि आसाराम बापू ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित अनेक राज्यों में धार्मिक एवं सामाजिक जागरण के कार्यक्रम चलाए तथा बड़ी संख्या में लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया। उनके अनुसार, इन्हीं गतिविधियों के कारण उन्हें विभिन्न स्तरों पर विरोध का सामना करना पड़ा।
फैसले पर उठाए सवाल
स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज ने कहा कि मामले में कुछ सह-आरोपितों को राहत मिलने के बावजूद आसाराम बापू की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा जाना संत समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय को लेकर संत समाज के भीतर व्यापक चर्चा चल रही है और कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय से उम्मीद
महामंडलेश्वर ने कहा कि संत समाज संविधान और न्यायपालिका का सम्मान करता है तथा उसे सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा विश्वास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले की आगे की सुनवाई में सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर व्यापक विचार किया जाएगा तथा न्याय सुनिश्चित होगा।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
उन्होंने सरकार से भी अपील की कि मामले के सभी पहलुओं पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए। उनका कहना था कि संत समाज चाहता है कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से शीघ्र समाधान निकले और आसाराम बापू को न्याय मिले।
चकाई में दिए गए इस बयान के बाद आसाराम बापू प्रकरण एक बार फिर चर्चा में आ गया है। संत समाज की ओर से उठाई गई रिहाई की मांग और उच्च न्यायालय के फैसले पर व्यक्त असहमति ने इस मामले को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।