हिंदू समाज की एकता पर बोले मोहन भागवत, कहा– भारत बनेगा वैश्विक मार्गदर्शक राष्ट्र

हिंदू समाज की एकता पर बोले मोहन भागवत, कहा– भारत बनेगा वैश्विक मार्गदर्शक राष्ट्र

वृंदावन में आयोजित एक भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू समाज की एकता को लेकर महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सनातन और हिंदू समाज संगठित होता जाएगा, वैसे-वैसे समाज को तोड़ने वाली शक्तियां स्वतः कमजोर होती जाएंगी।

भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कई दशकों का अनुभव बताता है कि हिंदू समाज के संगठित होने के साथ ही विरोधी ताकतों में बिखराव देखने को मिला है। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका संकेत किन समूहों की ओर था, लेकिन उनका जोर समाज की एकता पर रहा।

20–30 वर्षों में भारत की वैश्विक भूमिका

संघ प्रमुख ने कहा कि यदि समाज को जोड़ने का कार्य निरंतर चलता रहा, तो आने वाले 20 से 30 वर्षों में भारत पूरी दुनिया को शांति और संतुलन का मार्ग दिखाने वाला राष्ट्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान एक धर्मप्रधान राष्ट्र के रूप में बनी रहेगी और इसे कोई बदल नहीं सकता, क्योंकि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा इसी उद्देश्य से जुड़ी हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनौतियां इसलिए सामने आती दिख रही हैं क्योंकि समाज अभी पूरी तरह संगठित नहीं हो पाया है। जैसे ही तैयारी पूर्ण होगी, ये बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।

ऐतिहासिक अनुभवों का उल्लेख

मोहन भागवत ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हिंदू समाज कभी भी बाहरी आक्रमणकारियों की ताकत से पराजित नहीं हुआ, बल्कि आपसी मतभेद ही उसकी कमजोरी बने। मुगल काल के लंबे संघर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अत्याचारों के बावजूद सनातन परंपरा कमजोर नहीं पड़ी, बल्कि समय के साथ और अधिक सशक्त होकर उभरी।

वृंदावन में शताब्दी समारोह

संघ प्रमुख वृंदावन में सुदामा कुटी आश्रम द्वारा आयोजित रामानन्दी सम्प्रदाय के प्रवर्तक रामानन्दाचार्य की 726वीं जयंती और संत सुदामा दास के वृंदावन आगमन के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में शामिल हुए। यमुना तट स्थित कुंभ मेला क्षेत्र में हुए इस आयोजन में देशभर से संत-महात्मा और विद्वान एकत्र हुए।

सामाजिक समरसता पर जोर

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के विचारों का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक संस्कार और नागरिक कर्तव्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भेदभाव रहित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव बन सकता है।

अन्य गतिविधियों में भी रहे सक्रिय

कार्यक्रम से पूर्व संघ प्रमुख ने वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में पूजा-अर्चना की और ‘अक्षय पात्र’ योजना के अंतर्गत संचालित मध्याह्न भोजन कार्यक्रम का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं बच्चों को भोजन परोसा और उनसे संवाद भी किया। इसके अलावा सुदामा कुटी में पुनर्निर्मित मंदिर का लोकार्पण, एक पुस्तक विमोचन और गोसेवा पर आधारित फिल्म के पोस्टर का अनावरण भी किया।

“परिस्थितियां हमें नहीं तोड़ सकतीं”

भागवत ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां पहले भी देखी जा चुकी हैं और वे भारत या हिंदू समाज को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि वे केवल पर्वों या आयोजनों तक सीमित न रहें, बल्कि हर सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े हों।

यह शताब्दी समारोह अगले दस दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगा।