प्रयागराज: पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कुंभ एवं माघ मेला के दौरान संतों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटी पकड़ना सनातन परंपरा के विरुद्ध है और यह पूरी तरह निंदनीय है।
माघ मेला क्षेत्र स्थित शिविर में गुरुवार को आयोजित जनसंवाद के दौरान शंकराचार्यजी ने मौनी अमावस्या के दिन संतों के साथ हुए व्यवहार पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में स्नान की एक निश्चित मर्यादा है, जिसे शंकराचार्य हों या अन्य संत—सभी को पालन करना चाहिए।
शासनतंत्र पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ के प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान नागा संन्यासियों और शंकराचार्यों के बीच प्रशासन द्वारा असमान व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कहा कि नागा संन्यासियों के लिए विशेष कॉरिडोर बनाकर स्नान की पूरी व्यवस्था की जाती है, जबकि शंकराचार्यों के स्नान को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं रहता।
उन्होंने कहा, “शंकराचार्य स्नान करें या न करें, इसकी किसी को चिंता नहीं होती, यह शासनतंत्र के भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है।”
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि वे उनके अत्यंत प्रिय हैं। उन्होंने बताया कि जानकारी मिली थी कि अविमुक्तेश्वरानंद एक दिन उनके शिविर के द्वार तक आए थे। यदि वे भीतर आते, तो उनसे विस्तार से संवाद किया जाता।
अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद को लेकर चल रहे विवाद पर उन्होंने कहा कि दो शंकराचार्यों का उन्हें समर्थन प्राप्त है, जिनमें एक उनके गुरुभाई भी हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
इस बीच माघ मेले में पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने भी गुरुवार को पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान सभी ने एक-दूसरे का कुशलक्षेम जाना और शंकराचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया।