शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती का बड़ा बयान: गाय और गंगा भारत की आत्मा, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से संकट में अस्तित्व

शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती का बड़ा बयान: गाय और गंगा भारत की आत्मा, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से संकट में अस्तित्व

प्रयागराज : पुरी गोवर्धनमठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि गाय और गंगा भारत की आत्मा हैं, लेकिन आज दोनों अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को जिम्मेदार ठहराया।

शुक्रवार को वसंत पंचमी के पावन अवसर पर शंकराचार्य के 145वें पट्टाभिषेक तिथि के उपलक्ष्य में उनका भव्य स्वागत किया गया। माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-4 स्थित त्रिवेणी मार्ग पर बनाए गए पुरी शंकराचार्य शिविर में बड़ी संख्या में शिष्य और श्रद्धालु पहुंचे और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस दौरान शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदू युवाओं को अपने आचार-विचार में धर्म को स्थान देना होगा, तभी व्यवहार में भी धर्म दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी सजग और जागरूक है, जरूरत है कि दर्शन, विज्ञान और व्यवहार के संतुलन से उन्हें भटकने से बचाया जाए।

गंगा संरक्षण पर चिंता जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों से जुड़ी है। मानव जीवन की रक्षा के लिए मां गंगा को उसके मौलिक और प्राकृतिक स्वरूप में लौटाना अनिवार्य है। उन्होंने विकास के नाम पर प्रकृति के अंधाधुंध दोहन पर सवाल उठाते हुए कहा कि महानगरों की फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला पानी और शहरों की गंदगी नदियों में जाने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

बताया गया कि 34 वर्ष पूर्व वसंत पंचमी के दिन ही स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का पुरी शंकराचार्य पीठ पर पट्टाभिषेक हुआ था। इस अवसर पर शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, आचार्य विवेक मिश्र (वृंदावन), प्रफुल्ल चैतन्य ब्रह्मचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी और राजेश चैतन्य ब्रह्मचारी सहित अन्य संतों ने माला पहनाकर उनका स्वागत और अभिनंदन किया।