हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक भाषा को लेकर एक अहम और सख्त निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ जैसे शब्दों का प्रयोग किसी भी सरकारी या शैक्षणिक दस्तावेज़ में नहीं किया जाएगा।
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य के सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल संविधान में मान्य शब्दावली — अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) — का ही उपयोग करें।
किन दस्तावेज़ों में नहीं होगा प्रयोग?
अब किसी भी सरकारी फाइल, पत्राचार, नोटशीट, आदेश, अधिसूचना या अन्य आधिकारिक संचार में प्रतिबंधित शब्दों का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित रहेगा। यदि ऐसा पाया गया, तो उसे निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा।
आदेश किन पर लागू होगा?
यह फैसला प्रशासन के हर स्तर पर प्रभावी होगा, जिसमें शामिल हैं—
सभी प्रशासनिक सचिव
विभागों के प्रमुख
बोर्ड और निगम
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU)
मंडल आयुक्त
उपायुक्त (DC)
उप-मंडल अधिकारी (नागरिक)
विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार
इन सभी अधिकारियों और संस्थानों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि भविष्य में भाषा संबंधी किसी भी प्रकार की चूक न हो।
शब्दों का ऐतिहासिक संदर्भ
‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग महात्मा गांधी ने अनुसूचित जातियों के लिए सम्मानसूचक शब्द के रूप में शुरू किया था, जिसका अर्थ “ईश्वर के लोग” बताया जाता है। लेकिन डॉ. भीमराव अंबेडकर इस शब्द के प्रयोग से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि इससे सामाजिक भेदभाव की वास्तविकता छिप जाती है, इसलिए उन्होंने संवैधानिक पहचान को अधिक उपयुक्त माना।
दोबारा आदेश क्यों जारी हुआ?
सरकारी समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि पहले से दिशा-निर्देश मौजूद होने के बावजूद कुछ विभाग अब भी पुराने शब्दों का उपयोग कर रहे थे। इसी लापरवाही को देखते हुए सरकार ने दोबारा स्पष्ट और कड़ा आदेश जारी कर दिया है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि आगे किसी भी स्तर पर इस तरह की भाषा का प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।