अशोक सिंघल जन्मशती: ‘लहूलुहान माथा और राम मंदिर का अटूट संकल्प’, PM मोदी ने याद किए विहिप नेता के अनसुने संस्मरण
नई दिल्ली: राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने एक विशेष लेख में उनके अद्वितीय संगठनात्मक कौशल, राष्ट्र समर्पण और सामाजिक समरसता के विजन को रेखांकित किया।
पीएम मोदी ने कहा कि अशोक सिंघल का पूरा जीवन राष्ट्रोत्कर्ष और समाज कल्याण के लिए समर्पित रहा। 1991 की ऐतिहासिक बोट क्लब रैली से लेकर आंदोलन के चरम पर सिंघल के लहूलुहान चेहरे की तस्वीर आज भी देश के मानस पटल पर अंकित है। पीएम ने कहा कि आज जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर साकार हो चुका है, तो यदि अशोक जी हमारे बीच होते तो उनकी प्रसन्नता की कोई सीमा न होती।
पीएम ने 1981 के अपने युवा कार्यकर्ता के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे सिंघल जी का एक पत्र उनके लिए प्रेरणास्रोत बन गया था। 2001 के कच्छ भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में अशोक सिंघल हमेशा पीड़ितों के बीच सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल रहे।
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि अशोक जी सामाजिक समरसता के प्रबल पक्षधर थे। वे समाज में हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर प्रत्येक व्यक्ति को समान गरिमा दिलाने के प्रति प्रतिबद्ध थे। यही वजह थी कि उन्होंने राम मंदिर के शिलान्यास की पहली ईंट बिहार से ताल्लुक रखने वाले वंचित वर्ग के विहिप कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल के हाथों रखवाई थी। पीएम मोदी ने युवाओं से अशोक सिंघल के आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण के उनके संकल्प को पूरा करने का आह्वान किया।