हरियाणा के पानीपत में कथित जबरन वसूली और साजिश से जुड़े मामले में अदालत ने आरोपियों को बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने महेंद्र चावला से जुड़े मामले में एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी, जबकि दूसरे आरोपी ने अपनी जमानत अर्जी स्वयं वापस ले ली।
दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब पुलिस ने आसाराम बापू और नारायण साईं प्रकरण में गवाह रहे महेंद्र चावला, उनके भाई और भतीजे को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोप है कि महेंद्र चावला ने एक चल रहे केस में गवाही को प्रभावित करने के नाम पर एक सरपंच से करीब 70 लाख रुपये वसूले और बाद में 80 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग भी की।
शिकायत के आधार पर थाना चांदनीबाग में केस दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 18 अप्रैल 2026 को तीनों को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान आरोपियों के पास से अब तक करीब 42–44 लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं और मामले में ब्लैकमेलिंग व जबरन वसूली की पुष्टि के लिए जांच जारी है।
इसी मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMlC) पानीपत की अदालत ने 4 मई 2026 को आरोपी राम प्रसाद (महेंद्र चावला का भतीजा) की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं। अभियोजन के अनुसार, आरोपियों पर लंबित मामलों को निपटाने के नाम पर जबरन वसूली की साजिश रचने का आरोप है। मामले में करीब 70 लाख रुपये की बड़ी रकम की बात सामने आई है, जिसमें से 1.15 लाख रुपये सीधे तौर पर आरोपियों से जुड़ा बताया गया है। अदालत ने यह भी माना कि मामला न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला है, इसलिए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
वहीं, इसी मामले में दूसरे आरोपी रमन चावला (महेंद्र चावला के भाई) ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) पानीपत की अदालत में दाखिल अपनी जमानत याचिका 28 अप्रैल 2026 को सुनवाई के दौरान वापस ले ली। उनके वकील के बयान के आधार पर अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जमानत याचिका पर की गई टिप्पणियों को मामले के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 6 मई 2026 को निर्धारित की गई है।