हरियाणा में सिस्टम की नाकामी: रिश्वतखोरों पर नकेल कसने में जुटी एजेंसियां पस्त, 70% आरोपी कोर्ट से छूटे; अधूरे सबूत बने ढाल
पानीपत: हरियाणा में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत उजागर हुई है। राज्य में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और पुलिस द्वारा दर्ज किए जाने वाले रिश्वत व भ्रष्टाचार के 70.2% मामलों में आरोपी अदालतों से बाइज्जत बरी हो रहे हैं।
हरियाणा के 21 जिलों की जिला अदालतों में 2023 से 2025 के बीच आए अदालती फैसलों की पड़ताल से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इन 3 वर्षों के दौरान भ्रष्टाचार के कुल 208 मामलों का निपटारा हुआ, जिनमें से महज 62 मामलों (29.8%) में ही आरोपियों को सजा हो सकी, जबकि 146 मामलों में आरोपी अदालत से बरी होकर निकल गए।
कानूनी जानकारों के अनुसार आरोपियों के छूटने के 4 मुख्य कारण:
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शिकायतकर्ता का मुकर जाना: कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं का अपने बयानों से पलट जाना।
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कमजोर व अधूरे साक्ष्य: जांच अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेने और बरामदगी के ठोस व वैज्ञानिक सबूत पेश न कर पाना।
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स्वतंत्र गवाहों की कमी: जांच के समय मौके पर निष्पक्ष प्रत्यक्षदर्शी न बनाना और स्वतंत्र गवाहों की गवाही का कमजोर पड़ना।
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झूठी शिकायतें: व्यक्तिगत रंजिश या बदले की भावना से दर्ज कराई गई फर्जी शिकायतें।
मामलों की पड़ताल से साफ हुआ कि कई प्रकरणों में जांच टीम रिश्वत की रकम तक बरामद नहीं कर सकी। वहीं कई मामलों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग वाले मूल मोबाइल, सिम कार्ड और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) जब्त न करने और अस्पष्ट आवाज के चलते कोर्ट ने आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।