फर्श से अर्श तक: कभी चाल में कटी रातें, सेट पर किया स्पॉट बॉय का काम; ऐसे बॉलीवुड के 'झक्कास' सुपरस्टार बने अनिल कपूर
मुंबई: आज जब भी बॉलीवुड में एनर्जी और फिटनेस की बात आती है, तो जुबां पर सबसे पहला नाम अनिल कपूर का आता है। जिनका 'झक्कास' अंदाज पिछले चार दशकों से करोड़ों दिलों पर राज कर रहा है, उनके इस मुकाम के पीछे आंसुओं और कड़े संघर्ष की एक लंबी दास्तान छिपी है।
मुंबई के चेंबूर की एक तंग चाल में पले-बढ़े अनिल कपूर के परिवार पर 1970 के दशक में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। फिल्म निर्माता पिता सुरिंदर कपूर की फिल्में लगातार फ्लॉप होने से परिवार लाखों रुपये के कर्ज में डूब गया। छह सदस्यों के परिवार का पेट पालने के लिए अनिल कपूर और उनके भाई बोनी कपूर ने संघर्ष का रास्ता चुना। अनिल को फिल्मों के सेट पर स्पॉट बॉय और बैकग्राउंड डांसर तक का काम करना पड़ा।
ऑडिशन के दौरान कमजोर कद-काठी बताकर उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता था। साल 1979 में फिल्म 'हमारे-तुम्हारे' में एक छोटा सा रोल मिलने के बावजूद अगले चार साल तक उन्हें कोई काम नहीं मिला, जिससे निराश होकर उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों का रुख किया।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 1983 में आई फिल्म 'वो सात दिन' उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बनी और फिर 1987 की ब्लॉकबस्टर 'मि. इंडिया' ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया। इसके बाद 'तेजाब', 'राम लखन', 'बेटा' और 'नायक' जैसी सुपरहिट फिल्मों की झड़ी लग गई।
145 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय, दो नेशनल अवॉर्ड और ऑस्कर विजेता फिल्म 'स्लमडॉग मिलेनियर' तक का सफर तय करने वाले अनिल कपूर ने साबित कर दिया कि हौसले मजबूत हों तो चाल से निकलकर भी दुनिया जीती जा सकती है।