“तिरंगे में चांद नहीं, चांद पर तिरंगा देखना चाहते हैं”धीरेंद्र शास्त्री ने ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की

“तिरंगे में चांद नहीं, चांद पर तिरंगा देखना चाहते हैं”धीरेंद्र शास्त्री ने ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की

बांदा यूपी: बांदा में आयोजित बाबा बागेश्वर धाम की विशाल दिव्य कथा के दूसरे दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देशभक्ति और सनातन संस्कृति को लेकर तीखे और भावनात्मक विचार रखे। मवई बाईपास चौराहा स्थित कथा स्थल से उन्होंने कहा कि वे उन लोगों के खिलाफ हैं जो तिरंगे में चांद देखने की बात करते हैं, जबकि उनका सपना चांद पर तिरंगा लहरते देखने का है।

धीरेंद्र शास्त्री ने भारतीय सेना के शौर्य को नमन करते हुए ऑपरेशन सिंदूर की खुले शब्दों में सराहना की। उन्होंने कहा कि देश से प्रेम करने वाले सैनिक सीमा पर जाकर अपने पराक्रम से भारत का मान बढ़ाते हैं। इस दौरान उन्होंने बांदा के एक ऐसे परिवार का उल्लेख किया, जिसके तीनों बेटे सेना में सेवा दे रहे हैं और जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में अपने-अपने स्तर पर वीरता का परिचय दिया। ऐसे सैनिकों को उन्होंने राष्ट्र का गौरव बताया।

सनातन धर्म की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि केवल सनातन संस्कृति ही नारी को पूज्य मानती है, जहां बेटियों को दुर्गा और बेटों को मोहन कहा जाता है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि प्रेम करना गलत नहीं है, लेकिन माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं होता। जीवन में सच्चा भरोसा केवल माता-पिता और ईश्वर पर ही करना चाहिए।

कथा के दौरान उन्होंने बांदा और बुंदेलखंड क्षेत्र के धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख किया और जनप्रतिनिधियों से केन नदी में भव्य महाआरती आयोजित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह कथा अब महाकुंभ का स्वरूप लेती जा रही है, जहां नजर डालने पर हर ओर सनातन संस्कृति की झलक दिखाई देती है।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भले ही यह पता न चले कि कितनों का जीवन बदला, लेकिन इन आयोजनों के माध्यम से हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी चल रही है और इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं हो सकता।