वृंदावन: कला जब आस्था से जुड़ती है, तो वह सिर्फ देखने की चीज़ नहीं रह जाती—वह आत्मा को छूने लगती है। ऐसा ही एक भावपूर्ण उदाहरण सामने आया है जमशेदपुर के युवा कलाकार विवेक मिश्रा का, जिन्होंने अपनी भक्ति को रंगों या ब्रश में नहीं, बल्कि 1 लाख 51 हजार मोतियों में ढालकर श्री प्रेमानंद जी महाराज को समर्पित किया।
यह चित्र केवल एक पोर्ट्रेट नहीं, बल्कि दो महीनों की साधना, धैर्य और समर्पण की कहानी है।
दो महीने की तपस्या, हर मोती एक साधना
मोतियों से चित्र उकेरने की विशिष्ट कला में पहले ही पहचान बना चुके विवेक मिश्रा इस बार किसी प्रदर्शन या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि गुरु-भक्ति के भाव से जुड़े थे।
लगातार लगभग 60 दिनों तक उन्होंने इस चित्र पर काम किया। उनके लिए हर मोती केवल सजावट नहीं था, बल्कि मंत्र-जप की तरह एक भाव था, जिसे श्रद्धा के साथ जोड़ा गया।
वृंदावन की यात्रा और वह अविस्मरणीय क्षण
17 फरवरी को विवेक वृंदावन के केली कुंज आश्रम पहुंचे। 20 फरवरी को उन्हें वह अवसर मिला, जो जीवन भर स्मृति बन जाता है—प्रेमानंद जी महाराज से साक्षात भेंट।
इस चित्र में विवेक ने एक मोती जानबूझकर अधूरा छोड़ा था। उन्होंने वह अंतिम मोती श्रद्धापूर्वक महाराज जी को सौंपा। प्रेमानंद जी महाराज ने स्वयं अपने हाथों से उस मोती को चित्र में जड़ दिया और आशीर्वाद प्रदान किया।
विवेक के अनुसार, “वह पल जीवन का सबसे अमूल्य क्षण था।”
आश्रम का वातावरण और बदली सोच
विवेक बताते हैं कि केली कुंज आश्रम में प्रवेश करते ही उन्हें अलौकिक शांति का अनुभव हुआ।
वहां न कोई दिखावा, न कोई शुल्क—सिर्फ सेवा, प्रेम और सादगी। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु महाराज जी से भेंट करते हैं, और हर कोई संतोष लेकर लौटता है।
करीब 20 मिनट की बातचीत ने विवेक के जीवन-दृष्टिकोण को ही बदल दिया।
उनका कहना है,
“महाराज जी से मिलकर समझ आया कि क्रोध, छल और हिंसा व्यर्थ हैं। सच्चाई और प्रेम ही जीवन का वास्तविक मार्ग है।”
अब अगली भक्ति-यात्रा की तैयारी
इस दिव्य अनुभव के बाद विवेक अब एक और बड़ी साधना में जुट चुके हैं। प्रेमानंद जी महाराज के मार्गदर्शन में वह राधा-कृष्ण की लगभग 10 फीट ऊंची भव्य पोर्ट्रेट तैयार कर रहे हैं, जिसमें करीब 5 लाख मोतियों का उपयोग होगा।
विवेक के लिए यह परियोजना सिर्फ कला नहीं, बल्कि आस्था की अगली सीढ़ी है।
विवेक मिश्रा की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब श्रद्धा सच्चे मन से जुड़ती है, तो मोती भी मंत्र बन जाते हैं और कला, ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बन जाती है।p