डीजल के दामों ने बढ़ाई बेचैनी: ट्रंप का यू-टर्न, भारत-चीन पर टैरिफ की बात करने वाला अमेरिका अब खुद रूस से खरीदेगा तेल!
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में 3 नवंबर को होने जा रहे मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। घरेलू बाजार में डीजल के बेतहाशा बढ़ते दामों को काबू में करने के लिए अमेरिका ने अपनी पुरानी नीतियों को दरकिनार करते हुए रूस से डीजल खरीदने का चौंकाने वाला फैसला किया है। साल 2022 से अमेरिका ने रूस से तेल या किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा था, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने रूसी डीजल की खरीद पर लगी रोक 7 अप्रैल 2027 तक के लिए हटा दी है।
महंगाई की मार: ₹95 से ₹161 प्रति लीटर पहुंचा डीजल
ईरान जंग के पहले यानी 27 फरवरी तक अमेरिका में जो डीजल 95 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, उसकी कीमत उछलकर अब 161 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिका के पास कच्चे तेल (Crude Oil) के भारी भूमिगत भंडार मौजूद हैं, लेकिन घरेलू रिफाइनरी क्षमता बेहद सीमित है और अमेरिकी कंपनियां रिफाइनरी में नया पूंजी निवेश करने से कतराती हैं। यही वजह है कि अमेरिका को तैयार डीजल और पेट्रोल का आयात करना पड़ता है।
टैरिफ कानून में बदलाव और मिडटर्म का दबाव
यह कदम इसलिए भी सनसनीखेज माना जा रहा है क्योंकि पिछले ही महीने ट्रंप ने उस कानून पर दस्तखत किए थे, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक दंडात्मक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। अब ट्रंप खुद इस कानून के प्रावधानों में ढील देने की तैयारी में हैं।
सौदे के तहत रूस अमेरिका को कुल 30 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके जरिए यूरोपीय और एशियाई बाजारों में भी रूसी डीजल के रास्ते खुलेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ईंधन के दाम घटाकर ट्रंप मिडटर्म चुनावों में अपने पारंपरिक ग्रामीण वोट बैंक—विशेषकर किसानों, पशुपालकों और ट्रक ड्राइवर्स—को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।