पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: शुभेंदु अधिकारी के एक्शन से हिली ममता, नेपाल बॉर्डर से दबोचा गया मुख्य आरोपी
प्रशासनिक सर्जरी और जमीनी हकीकत: पूर्व DGP डॉ. विक्रम सिंह का बड़ा खुलासा
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में एक अभूतपूर्व भूचाल आ चुका है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद की सात्विक भूमि कहे जाने वाले बंगाल से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर प्रशासनिक गलियारे से आ रही है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के कड़े रुख और केंद्रीय हस्तक्षेप के बाद राज्य में एक झटके में 179 IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है, जिसमें 12 जिलों के एसपी (SP) भी शामिल हैं। इसके अलावा वेस्ट बंगाल पुलिस सर्विस के 28 अधिकारियों को भी इधर से उधर किया गया है।
अल्टनेट मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार गायत्री देवी के साथ एक विशेष बातचीत में उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी (DGP) डॉ. विक्रम सिंह ने बंगाल की कानून व्यवस्था और आरजी कार (RG Kar) मामले पर तीखे फैक्ट्स सामने रखे हैं।
प्रमुख बिंदु: बंगाल की प्रशासनिक रीढ़ पर प्रहार
-
नेपाल बॉर्डर से दबोचा गया जहांगीर खान: न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और महिला अधिकारियों के साथ संवेदनहीन व्यवहार करने का मुख्य आरोपी टीएमसी नेता जहांगीर खान खुद को 'पुष्पा' समझकर भागने की फिराक में था, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने भारत-नेपाल सीमा से घसीटकर गिरफ्तार कर लिया है। वह अब पुलिस कस्टडी में 'तोते' की तरह राज उगल रहा है।
-
तालाबों से मिलीं 17 बंदूकें, TMC दफ्तर से 100 बम: डोमजूर (हावड़ा) में टीएमसी दफ्तर से 100 अत्यधिक मारक क्षमता वाले 'द्विधर्मी' सुतली बम बरामद हुए हैं। वहीं संदेशखाली के मुख्य आरोपी शाहजहां शेख के ठिकानों और तालाबों से मछलियों की जगह 17 अवैध बंदूकें और भारी मात्रा में बारूद बरामद किया गया है।
-
आरजी कार मामले में 3 सीनियर IPS सस्पेंड: साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने, एफआईआर (FIR) में देरी करने और पीड़िता के परिजनों को पैसों की पेशकश कर मानवता को कलंकित करने के आरोप में पूर्व कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, डीसीपी नॉर्थ अभिषेक गुप्ता और डीसीपी सेंट्रल इंदिरा मुखर्जी को निलंबित कर दिया गया है।
-
अभिषेक बनर्जी के गढ़ में एक्शन: डायमंड हारबर की पुलिस अधीक्षक (SP) ईशानी पाल का भी तबादला कर दिया गया है, जिन्हें टीएमसी के इशारे पर काम करने वाले अधिकारियों की सूची में रखा गया था।
राजनीतिक आकाओं के इशारे पर नाचने वाले अफसरों की अब खैर नहीं
पूर्व डीजीपी डॉ. विक्रम सिंह ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जो अधिकारी आईपीएस (IPS) ड्रेस रेगुलेशन और ऑल इंडिया कंडक्ट रूल्स को ताक पर रखकर ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठते थे या प्रधानमंत्री के आगमन पर प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते थे, उन्हें केवल सस्पेंड नहीं बल्कि सीधे सेवामुक्त (Dismiss) किया जाना चाहिए।
"नेताजी सुभाष चंद्र बोस कहते थे कि 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा'। लेकिन आज ममता सरकार का नारा बन चुका है कि 'तुम मुझे वोट दो, खून तो मैं तुम्हारा ले ही लूंगी'। बंगाल की जनता ने हिंसक राजनेताओं और अधिकारियों को अंडों से मारकर प्रतीकात्मक रूप से अपमानित कर एक नई शुरुआत की है।" - डॉ. विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी, उत्तर प्रदेश