विशेष जाँच रिपोर्ट: 'कोचिंग गुरु' या प्रोपेगेंडा मशीन? ऑनलाइन शिक्षा के पीछे का अनसुना सच
नई दिल्ली/पटना। हाल के दिनों में मुख्यधारा की मीडिया में जो खबरें सतह पर तैरती रही हैं, वे अक्सर किसी गहरी साजिश का केवल एक सिरा होती हैं। देश के सबसे बड़े ऑनलाइन 'कोचिंग गुरुओं' और कल्ट आकृतियों (Cult Figures) के इर्द-गिर्द बुना गया साम्राज्य अब गंभीर कानूनी, राजनीतिक और अकादमिक सवालों के घेरे में है। 'The Jagran News' की इस विशेष खोजी रिपोर्ट में हम उन छिपे हुए तथ्यों को उजागर कर रहे हैं, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के विज्ञापनों और पीआर (PR) के शोर में दबा दिया जाता है।
1. तथाकथित हमला और कानूनी चक्रव्यूह: खान सर विवाद की असली सच्चाई
प्रसिद्ध कोचिंग संचालक फैजल खान (जिन्हें डिजिटल दुनिया में 'खान सर' के नाम से जाना जाता है) इस समय चौतरफा कानूनी जांच का सामना कर रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार अंजना ओम कश्यप द्वारा मानहानि (Defamation) का मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद यह मामला पूरी तरह गरमा गया है।
-
गार्ड का सनसनीखेज खुलासा: जांच के दौरान उनके निजी सुरक्षाकर्मी (Guard) ने यह बयान देकर सबको चौंका दिया कि खुद पर हुए कथित हमले और गोलीबारी की पटकथा पहले से तैयार की गई थी।
-
गंभीर धाराएं: वर्तमान में फैजल खान हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और आर्म्स एक्ट (Arms Act) जैसी संगीन कानूनी धाराओं का सामना कर रहे हैं। अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए वे लगातार अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की कोशिशों में जुटे हैं, जबकि पटना में उनके कोचिंग सेंटर को सील करने की प्रक्रिया भी विमर्श के दायरे में है।
2. राष्ट्रवाद का तड़का और छिपे हुए नैरेटिव
खोजी विश्लेषण से पता चलता है कि इन यूट्यूब शिक्षकों का उदय महज 'ऑर्गेनिक' या प्राकृतिक नहीं है। यदि हम कड़ियों को जोड़ें (Connect the Dots), तो इनके उभार और देश विरोधी ताकतों के नैरेटिव में एक अजीब समानता दिखाई देती है:
-
फार्म लॉ और अग्निवीर आंदोलन: कृषि कानूनों (Farm Laws) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान, जब विदेशी फंडिंग और ग्रेटा थनबर्ग या रिहाना जैसी हस्तियों के ट्वीट भारत विरोधी हैशटैग ट्रेंड करा रहे थे, ठीक उसी समय इन कल्ट शिक्षकों के वीडियो तेजी से वायरल किए गए। अग्निपथ योजना (अग्निवीर) के समय युवाओं को सड़कों पर उतारने और बिहार-यूपी में दंगे भड़काने के पीछे भी इन्हीं कोचिंग संस्थानों की भूमिका रेडार पर है।
-
ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़: कक्षाओं के भीतर राष्ट्रवाद का मुखौटा पहनकर ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करने का एक सुनियोजित खेल चल रहा है। उदाहरण के लिए, कश्मीर के विलय को लेकर महाराजा हरी सिंह पर कीचड़ उछालना और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निर्णयों को सही ठहराना, पूरी तरह से सैम मानेकशॉ जैसे सैन्य अधिकारियों के ऐतिहासिक दस्तावेजों के विपरीत है।
-
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भ्रामक रुख: हमास जैसी प्रतिबंधित आतंकी संस्थाओं को आतंकी मानने से इंकार करना और भारत के रणनीतिक साझेदार इजरायल के खिलाफ भ्रामक ऐतिहासिक दावे करना, इन संस्थानों के वैचारिक एजेंडे को साफ करता है।
3. 'कोचिंग माफिया' का रिब्रांडेड स्वरूप: शिक्षा या मदरसा संस्कृति?
अकादमिक जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि अभिनय शर्मा (Abhinay Maths) और अवध ओझा जैसे शिक्षकों की कक्षाओं का विश्लेषण करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि वे कोचिंग संस्थान कम और 'रिब्रांडेड मदरसे' अधिक चला रहे हैं।
-
विवादास्पद बयानबाजी: अभिनय शर्मा द्वारा औरंगजेब और टीपू सुल्तान को भारत के महानतम राजाओं के रूप में स्थापित करना और अवध ओझा द्वारा सातवीं शताब्दी के अरब रेगिस्तान के संदर्भों को लेकर दिए गए बयान, छात्रों के धर्मनिरपेक्ष बौद्धिक विकास के बजाय एक खास किस्म के धार्मिक नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं।
-
राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं: अवध ओझा द्वारा दिल्ली चुनाव के दौरान राजनीतिक बयानबाजी करना और एक राजनेता को साक्षात 'कृष्ण का अवतार' घोषित कर देना यह साबित करता है कि इन गुरुओं का अंतिम लक्ष्य शिक्षा नहीं, बल्कि राजनीति या 'बिग बॉस' जैसे रियलिटी शो के जरिए कल्ट स्टेटस हासिल करना है।
4. करोड़ों का पीआर (PR) और फेक क्रेडिबिलिटी का खेल
मुख्यधारा के टेलीविजन शोज़ जैसे 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) और 'द कपिल शर्मा शो' में इन शिक्षकों को 'राष्ट्र निर्माता' के रूप में पेश किया गया। सवाल यह उठता है कि रातों-रात बिना किसी प्रामाणिक प्रशासनिक पृष्ठभूमि के इन्हें यह सेलिब्रिटी स्टेटस किसने और क्यों दिया?
-
फंडिंग का रहस्य: ₹50 में इलाज का दावा करने वाले करोड़ों के अस्पताल और ₹100 में सालभर पढ़ाने के दावों के पीछे असलियत 'इकोनॉमीज ऑफ स्केल' (Economies of Scale) और भारी अज्ञात फंडिंग की है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले हजारों सफल छात्रों के आंकड़े पूरी तरह फर्जी होते हैं। एक ही सफल छात्र को चार अलग-अलग संस्थान अपना बताकर प्रचारित करते हैं।
-
डिग्री और योग्यता पर सवाल: विज्ञान से लेकर कृषि और रक्षा क्षेत्र (S-400 मिसाइल प्रणाली) तक हर विषय पर विशेषज्ञ की तरह बोलने वाले इन शिक्षकों की खुद की अकादमिक डिग्रियां जांच के दायरे में हैं। विकास दिव्यकीर्ति (Drishti IAS) जैसे शिक्षक, जिन्होंने '12th Fail' फिल्म के बाद खुद को एक महान त्यागी और सिविल सर्वेंट के रूप में स्थापित किया, आज तक अपनी वास्तविक रैंक और सिविल सेवा का वर्ष सार्वजनिक करने से बचते रहे हैं।
द जाग्रन न्यूज की अपील: 'यूट्यूब पब्लिसिटी' नहीं, योग्यता को परखें
इस पूरे नेक्सस (Nexus) का सबसे दुखद पहलू यह है कि देश का युवा वर्ग इस चकाचौंध, रील संस्कृति और द्विअर्थी संवादों वाली कक्षाओं के जाल में फंसकर अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष बर्बाद कर रहा है। यूपीएससी (UPSC) या किसी भी अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए 'माउथ पब्लिसिटी' (Seniors' Guide) और शिक्षकों की वास्तविक योग्यता को आधार बनाएं, न कि यूट्यूब के व्यूज और पीआर स्टंट को। शिक्षा संयम और चरित्र निर्माण का माध्यम है, दंगों और प्रोपेगेंडा की मशीन नहीं।