विशेष श्रृंखला : रणदीप हुड्डा के 7 बड़े बयान | भाग-2
'27 साल जेल में रहे व्यक्ति को माफीवीर कैसे कह सकते हैं?' : रणदीप हुड्डा
अभिनेता एवं फिल्म निर्माता रणदीप हुड्डा ने स्वतंत्रता सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर को लेकर वर्षों से चल रही 'माफीवीर' बहस पर अपनी राय रखी। उनका कहना है कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व का मूल्यांकन केवल एक पहलू के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
रणदीप हुड्डा ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने लगभग 27 वर्ष जेल और प्रतिबंधों के बीच जीवन बिताया हो, उसे केवल 'माफीवीर' कहकर संबोधित करना क्या उचित है?
सावरकर के संघर्ष का किया उल्लेख
रणदीप हुड्डा ने कहा कि वीर सावरकर ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष में बिताया। उन्होंने विशेष रूप से अंडमान की सेल्युलर जेल में बिताए वर्षों और बाद के प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पूरे जीवन को एक व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उनके अनुसार किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके संपूर्ण जीवन और परिस्थितियों का अध्ययन आवश्यक है।
'माफीवीर' शब्द पर उठाया सवाल
रणदीप हुड्डा ने कहा कि सार्वजनिक विमर्श में अक्सर वीर सावरकर को 'माफीवीर' कहकर संबोधित किया जाता है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा—
"जो व्यक्ति लगभग 27 साल जेल और नजरबंदी जैसी परिस्थितियों में रहा, उसे केवल 'माफीवीर' कैसे कहा जा सकता है?"
उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि तथ्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर समझा जाना चाहिए।