73 लाख किसानों ने छोड़ी फसल बीमा योजना

73 लाख किसानों ने छोड़ी फसल बीमा योजना

​2 साल में 73 लाख किसानों ने छोड़ी फसल बीमा योजना, क्लेम मिलने में देरी से बढ़ा मोहभंग

​प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से किसानों का मोहभंग होता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज दो सालों में 73 लाख (करीब 29.6%) किसानों ने इस योजना से किनारा कर लिया है।

​क्यों घट रही है किसानों की दिलचस्पी?

​कम मुआवजा और देरी: किसानों की सबसे बड़ी शिकायत है कि फसल खराब होने पर नुकसान का सही आकलन नहीं होता। क्लेम का पैसा मिलने में महीनों लग जाते हैं और वास्तविक नुकसान के मुकाबले मुआवजा बहुत कम मिलता है। सारी प्रक्रिया सर्वे और औसत के गणित में उलझ कर रह जाती है।

​योजना का स्वैच्छिक होना: 2016 में जब यह योजना शुरू हुई थी, तब कर्ज लेने वाले किसानों के लिए बीमा अनिवार्य था (बैंक सीधे प्रीमियम काट लेते थे)। 2020 में इसे स्वैच्छिक (voluntary) कर दिया गया, जिसके बाद से किसानों ने खुद ही इससे दूरी बनानी शुरू कर दी।

​चौंकाने वाले आंकड़े (खरीफ सीजन):

​2024 में जहां 2.47 करोड़ किसान इस योजना से जुड़े थे, वहीं 2026 आते-आते यह संख्या घटकर मात्र 1.74 करोड़ रह गई है।

​बीमित रकबा (इलाका) भी 310 लाख हेक्टेयर (2024) से घटकर अब 205.52 लाख हेक्टेयर (2026) पर आ गया है।

​योजना के प्रचार-प्रसार पर पिछले 10 सालों में 664 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जटिल सर्वे प्रक्रिया और लेट-लतीफी के कारण किसानों का इस 'सुरक्षा कवच' से भरोसा उठ रहा है।