गोबर गैस स्लरी बनी किसानों के लिए वरदान, बढ़ रही जैविक खेती की ताकत
विशेष संवाददाता
खेती की बढ़ती लागत और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता के बीच गोबर गैस स्लरी (बायोगैस संयंत्र से निकलने वाला घोल) किसानों के लिए एक प्रभावी एवं पोषक जैविक खाद के रूप में उभर रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका नियमित उपयोग न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सकारात्मक सुधार लाता है।
लीलाशाहजी बायोगैस कंपनी से जुड़े श्री रोहन कुमार ने बताया कि गोबर गैस स्लरी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। बायोगैस प्रक्रिया के बाद ये तत्व पौधों द्वारा अधिक आसानी से अवशोषित किए जा सकते हैं, जिससे फसलों को शीघ्र पोषण मिलता है।
उन्होंने बताया कि स्लरी के नियमित उपयोग से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ (ऑर्गेनिक कार्बन) की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी अधिक भुरभुरी, उपजाऊ और जल धारण करने में सक्षम बनती है। इसके उपयोग से रासायनिक उर्वरकों जैसे यूरिया और डीएपी की आवश्यकता भी काफी कम हो जाती है, जिससे किसानों की खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
खेती में उपयोग के प्रमुख तरीके
- सिंचाई के साथ उपयोग: स्लरी को पानी में मिलाकर तरल खाद (लिक्विड फर्टिलाइज़र) के रूप में सिंचाई के दौरान खेतों में दिया जा सकता है।
- कम्पोस्ट तैयार करना: स्लरी को खेत के जैविक अवशेष, सूखे पत्तों या अन्य कृषि अपशिष्ट के साथ मिलाकर उच्च गुणवत्ता वाली कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है।
- सीधा प्रयोग: अच्छी तरह छानी गई पतली स्लरी को फसलों की जड़ों के पास डालने से पौधों को सीधे पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।
श्री रोहन कुमार ने बताया कि पिछले 20 वर्षों के अपने अनुभव में उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में जैविक खेती को निकट से देखा और उससे जुड़े किसानों के साथ कार्य किया है। उनके अनुसार निवाई (टोंक), लुधियाना, प्रयागराज, जलगांव, वृन्दावन, ओरई तथा अहमदाबाद सहित अनेक स्थानों पर गोबर गैस स्लरी के उपयोग से किसानों को बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और रासायनिक खाद पर कम निर्भरता जैसे सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि वे टिकाऊ, कम लागत वाली और पर्यावरण-अनुकूल खेती अपनाना चाहते हैं, तो गोबर गैस स्लरी का अधिकाधिक उपयोग करें। यह न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि जैविक खेती को भी नई मजबूती प्रदान करती है।