नई दिल्ली, 11 जुलाई 2026। देश में मानसून की धीमी रफ्तार अब कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण खरीफ फसलों की बुआई बुरी तरह प्रभावित हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार खरीफ फसलों की कुल बुआई पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत पीछे चल रही है। मौसम विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि जल्द ही व्यापक और नियमित वर्षा नहीं हुई तो इसका असर कृषि उत्पादन, खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है।
आधे भारत में सामान्य से कम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश के बड़े हिस्से में इस बार मानसून अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। कई राज्यों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। विशेष रूप से उत्तर भारत, मध्य भारत और कुछ पश्चिमी क्षेत्रों में बारिश की कमी देखी गई है। किसानों को समय पर बारिश का इंतजार है ताकि खेतों में बुआई का कार्य तेज हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून भारतीय कृषि की रीढ़ माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी कृषि भूमि आज भी वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में बारिश में कमी सीधे तौर पर फसल उत्पादन को प्रभावित करती है।
खरीफ बुआई में आई बड़ी गिरावट
कृषि मंत्रालय से जुड़े प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार धान, दाल, तिलहन और मोटे अनाज जैसी खरीफ फसलों की बुआई में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में कुल बुआई क्षेत्र लगभग 21 प्रतिशत कम बताया जा रहा है।
कई राज्यों में किसान पर्याप्त नमी के अभाव में बुआई शुरू नहीं कर पाए हैं। जिन क्षेत्रों में बुआई हो चुकी है, वहां भी फसलों के विकास पर मौसम का प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश की कमी के कारण किसानों की लागत बढ़ने लगी है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे अतिरिक्त पानी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे डीजल और बिजली पर खर्च बढ़ रहा है। वहीं छोटे और सीमांत किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं, जिसके कारण उनकी चिंता बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि यदि जुलाई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
महंगाई बढ़ने की आशंका
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीफ उत्पादन प्रभावित होता है तो आने वाले महीनों में खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। धान, दाल और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार कम होने पर बाजार में आपूर्ति घट सकती है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार कृषि उत्पादन में गिरावट का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है और किसानों की आय प्रभावित होती है।
सरकार और मौसम विभाग की नजर
केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मानसून की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में आगामी दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि बारिश सामान्य स्तर पर लौटती है तो बुआई में आई कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है।
कृषि विभाग ने राज्यों को किसानों की सहायता और आवश्यक कृषि सलाह उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का दूसरा पखवाड़ा खरीफ सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि इस दौरान पर्याप्त वर्षा होती है तो कृषि क्षेत्र को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि मानसून कमजोर बना रहता है तो उत्पादन, किसानों की आय और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।