खान सर का सच

खान सर का सच

पटना कोचिंग कांड: 'माफिया' खान सर के फर्जी साम्राज्य का काउंटडाउन; नेपाल मर्डर और खूनी जंग में जातिगत राजनीति व वीआईपी ट्रीटमेंट का पूरा सच

पटना: पटना के चर्चित किशन कोल्ड स्टोरेज कैंपस से ऑपरेट करने वाले दो सबसे बड़े ऑनलाइन-ऑफलाइन दिग्गजों—खान ग्लोबल स्टडीज के खान सर (फैजल खान) और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के रोशन आनंद (यादव)—के बीच की लड़ाई ने अब बिहार के शिक्षा इतिहास को कलंकित कर दिया है। जहाँ एक तरफ खान सर को पटना जिला अदालत से अस्थायी राहत (गिरफ्तारी और बल प्रयोग पर रोक) मिल गई है, वहीं दूसरी ओर उनके रसूख, पुलिसिया पक्षपात और फर्जी अफसरों के कारखाने को लेकर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों तक हड़कंप मच गया है।

1. 2 जून की रात का सच: रचित फायरिंग और एकतरफा गिरफ्तारी

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब 2 जून की रात किशन कोल्ड स्टोरेज कैंपस के बाहर अचानक गोलियां चलीं।

  • खान सर का तुरंत मीडिया स्टंट: घटना के तुरंत बाद खान सर ने खुद मीडिया के सामने आकर बयान दिया कि "पड़ोस के कोचिंग माफिया (ज्ञान बिंदु) ने उन पर हमला करवाया है और उनके संस्थान पर बमबारी की पुरानी आदत रही है।"

  • पुलिस का वीआईपी पक्षपात: पटना पुलिस ने बिना किसी प्राथमिक जांच या सबूत के, घटना के मात्र 4 घंटे के भीतर ज्ञान बिंदु के संचालक रोशन आनंद को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। रोशन आनंद को लगभग दो हफ्ते तक जेल की सलाखों के पीछे प्रताड़ित होना पड़ा।

  • सीसीटीवी ने खोली पोल: जब सोशल मीडिया पर बवाल मचा और पुलिस ने सीसीटीवी (CCTV) खंगाला, तो सच सामने आया कि हवाई फायरिंग किसी विरोधी ने नहीं, बल्कि खुद खान सर के ही पर्सनल बॉडीगार्ड ने उनके कहने पर की थी। बॉडीगार्ड ने पुलिस हिरासत में कबूल किया: "खान सर ने बोला था कि गोली चला दो, जो होगा मैं देख लूंगा।" इसके बावजूद, कन्हैया कुमार (खान सर का आदमी) के प्रभाव में मूल शिकायतकर्ता कोल्ड स्टोरेज के मालिक के बजाय खान सर को पीड़ित प्रोजेक्ट किया गया।

2. कानून से भगोड़े: 'फास्टैग' हटाकर वृंदावन फरार हुए खान सर

शॉकिंग खुलासा यह है कि खान सर अग्रिम जमानत (Anticipatory Bell) मिलने के बाद खुद अपनी क्लास में छात्रों के सामने छाती ठोककर कानून का मखौल उड़ाते दिखे। उन्होंने स्वीकार किया कि:

"जिस दिन फायरिंग हुई, मैं अपनी गाड़ी से पटना से फरार हो गया। पुलिस और टोल टैक्स की ट्रैकिंग से बचने के लिए मैंने अपनी गाड़ी का फास्टैग (FASTag) उखाड़कर फेंक दिया। टोल नाके पर जब रोका गया, तो मैंने कानून तोड़ने का डबल जुर्माना नकद (Cash) भरा और सीधे वृंदावन जाकर छिप गया।"

वरिष्ठ शिक्षकों और कानूनी जानकारों के अनुसार, जीबा खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के तहत अग्रिम जमानत देते समय अपराधी का आपराधिक इतिहास (Antecedents) और उसका आचरण देखा जाता है। जो व्यक्ति खुद ऑन-कैमरा कानून की गिरफ्त से भागने और सबूत मिटाने की बात कबूल कर रहा हो, उसे बिहार सरकार और कोर्ट से इतनी रियायत मिलना न्यायिक समानता पर गहरा सवाल है।

3. 'आयोग' और विपिन सर का पर्दाफाश: 'फर्जी' अफसरों का कारखाना

गणित के शिक्षक विपिन यादव (मैथ मस्ती) ने खान सर के उस काले धंधे को उजागर किया है, जो सीधे देश की आंतरिक सुरक्षा और मासूम युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। खान सर अपने महंगे कोर्सेज (जो ₹70,000 से लेकर ₹2,00,000 तक के हैं) को बेचने के लिए मंच पर फर्जी सिलेक्टेड छात्र लाते थे:

फर्जी पद (Fake Designation) मंच पर पेश व्यक्ति का सच (Reality) सामाजिक और पारिवारिक दुष्परिणाम (Consequences)
रेवेन्यू ऑफिसर (RO) अंकिता (साधारण कंप्यूटर डेटा एंट्री ऑपरेटर) इस झांसे में आकर एक पुलिस इंस्पेक्टर ने अपनी बेटी की शादी करा दी, जिंदगी बर्बाद हुई और अब कोर्ट में तलाक चल रहा है।
इनकम टैक्स इंस्पेक्टर एक साधारण मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) मंच पर लाकर हजारों छात्रों से इसके पैर छुलवाए गए, ताकि बच्चों को इमोशनली अरेस्ट किया जा सके।
विंग कमांडर (Indian Air Force) नीरज तिवारी और तुषार (लिखित परीक्षा में फेल छात्र) 8 अक्टूबर (एयरफोर्स डे) के आसपास नया डिफेंस बैच बेचने के लिए वायुसेना की फर्जी वर्दी और स्क्रिप्ट तैयार की गई।

ये फर्जी अफसर बाद में समाज में असली अधिकारी बनकर घूमते थे, शादियां करते थे और ऑन-ग्राउंड जबरन वसूली (Extortion) का सिंडिकेट चलाते थे। इस राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन पर अब इंडियन एयरफोर्स (IAF) और सेना द्वारा कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बैठाए जाने की मांग की जा रही है।

4. संदिग्ध 'नेपाल मर्डर' और आईएसआई (ISI) एंगल

इस खूनी वर्चस्व की जंग में रोशन आनंद के सगे भाई प्रिंस यादव (जो ज्ञान बिंदु का मैनेजमेंट देखते थे) की नेपाल सीमा क्षेत्र में बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रोशन आनंद को भाई की मौत के एक दिन बाद जेल से नियमित जमानत मिली।

रोशन आनंद बीते कई दिनों से बिना कपड़े बदले अपने पिता (जो इस सदमे से आईसीयू में भर्ती हैं) के साथ न्याय की भीख मांग रहे हैं। खान सर यह जानते थे कि भारतीय क्षेत्र के बाहर (नेपाल टेरिटरी) हुई किसी भी वारदात पर भारत में सीधे धारा 302 के तहत एफआईआर या सीबीआई (CBI) जांच नहीं हो सकती। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस मर्डर के पीछे नेपाल बॉर्डर पर सक्रिय आईएसआई (ISI) के स्लीपर सेल्स का हाथ हो सकता है, क्योंकि खान सर के अंतरराष्ट्रीय और देश-विरोधी ताकतों से साठगांठ के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।

5. एमवाई (MY) समीकरण की गंदी राजनीति और पप्पू यादव का स्वार्थ

पटना के सबसे पुराने शिक्षक गुरु रहमान (1994 बैच, कलाम साहब द्वारा सम्मानित) ने गरजते हुए कहा:

"लालू जी के राज में भी गोलियां चलीं, लेकिन शिक्षकों के बीच ऐसा नीच वर्चस्व कभी नहीं देखा गया। यह खान (जिसका असली नाम फैजल खान और बाप का नाम बशीर है, जो कभी अमित सिंह तो कभी नूर मोहम्मद बनकर छात्रों को ब्लैकमेल करता है) शिक्षा का दलाल है।"

बिहार के कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के कुल 19,391 पदों में से खान सर ने अकेले 12,000 और रोशन आनंद ने 10,000 सिलेक्शन का झूठा दावा ठोक दिया (कुल पद से ज्यादा सिलेक्शन!)। टॉपर अभिषेक पटेल को ₹10 लाख देकर चैट सार्वजनिक होने के बाद खान सर बौखला गए थे।

इस मामले में बिहार के तथाकथित मसीहा और राजनेता (जैसे पप्पू यादव और तेजस्वी यादव) पूरी तरह चुप हैं या दोनों पक्षों में समझौता कराने का दबाव बना रहे हैं। कारण साफ है—एमवाई (MY - मुस्लिम + यादव) समीकरण। नेताओं को डर है कि फैजल खान पर कार्रवाई हुई तो उनका एकमुश्त थोक वोट बैंक खिसक जाएगा। इसलिए रोशन आनंद (यादव) के भाई की मौत और खुद उनके आईसीयू में होने के बावजूद सरकार और राजनीतिक दल इस 'स्टार यूट्यूबर' के सामने नतमस्तक हैं।

निष्कर्ष: 25 जून को महाफैसला

विवेक बिंद्रा और कुछ बिकाऊ इन्फ्लुएंसर्स द्वारा पीआर मीटिंग कर खान सर के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं। पटना हाई कोर्ट ने खान सर की अर्जी पर बिहार सरकार से कड़ी केस डायरी और जवाब तलब किया है। 25 जून को कोर्ट का अंतिम फैसला आना है। यदि इस देश में कानून की समानता (अनुच्छेद 14) बची है, तो बच्चों के भविष्य को तिजोरी में बदलने वाले और फर्जी अफसरों के इस सरगना फैजल खान का सलाखों के पीछे जाना तय है।