अफगानिस्तान के सीक्रेट स्कूलों में जान जोखिम में डालकर पढ़ रहीं लड़कियां

अफगानिस्तान के सीक्रेट स्कूलों में जान जोखिम में डालकर पढ़ रहीं लड़कियां

अफगानिस्तान के सीक्रेट स्कूलों में जान जोखिम में डालकर पढ़ रहीं लड़कियां, तालिबान को शिक्षकों का जवाब- 'कलम ही हमारी बंदूक है'

काबुल: तालिबान के कड़े प्रतिबंधों और बंदूकों के खौफ के बीच अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की एक साहसिक और मूक क्रांति जारी है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में भूमिगत (सीक्रेट) स्कूल चलाए जा रहे हैं, जहां छात्राएं पिछले दरवाजों से छिपते-छिपाते पढ़ने पहुंच रही हैं।

सामान्य दिखने वाले प्राइमरी स्कूलों के पीछे छिपे गुप्त कमरों और बेसमेंट में ये कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। यहां पढ़ाने का मतलब केवल किताब खोलना नहीं, बल्कि जान जोखिम में डालना है। शिक्षक न केवल पढ़ाते हैं, बल्कि यह भी तय करते हैं कि छात्राएं किन रास्तों से आएंगी, खतरे का अलार्म कैसे बजेगा और तालिबान के छापे के वक्त उन्हें कहां छुपाया जाएगा।

हाल ही में एक सीक्रेट स्कूल में जब 14 लड़कियां फिजिक्स की परीक्षा दे रही थीं, तभी तालिबान लड़ाके औचक निरीक्षण पर पहुंच गए। प्रिंसिपल ने तुरंत कमरा बाहर से बंद किया और छात्राएं दम साधे खामोश बैठी रहीं, जिससे उनकी जान बची। अन्य गुप्त स्कूलों में वॉकी-टॉकी और विशेष सायरन से शिक्षकों को सतर्क किया जाता है।

साल 2022 में लड़कियों की उच्च शिक्षा पर बैन लगने के बाद हजारों शिक्षक बेरोजगार हो गए थे, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं खोया। कई शिक्षक बिना वेतन या बेहद कम मानदेय पर इन भूमिगत कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं। जब एक तालिबानी अधिकारी ने स्कूल प्रिंसिपल से कहा कि "मेरी बंदूक ही मेरी पहचान है", तो निडर प्रिंसिपल नजीब ने जवाब दिया— "मेरी बंदूक मेरी कलम है।"