कैंसर मरीज़ों के लिए पूर्वोत्तर से एक अच्छी खबर आई है। असम सरकार ने गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) में प्रोटॉन बीम थेरेपी सेंटर बनाने के लिए बेल्जियम की कंपनी आयन बीम एप्लीकेशंस (IBA) की भारतीय इकाई के साथ करार किया है। करीब ₹600 करोड़ की इस परियोजना को देश में सरकारी क्षेत्र का पहला प्रोटॉन थेरेपी सेंटर बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
गुवाहाटी के लोक सेवा भवन में 31 अक्टूबर को करार पर हस्ताक्षर के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अब तक भारत में प्रोटॉन थेरेपी केवल निजी अस्पतालों में उपलब्ध है, जहां इलाज का खर्च ₹50 लाख तक पहुंच जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकारी सेंटर बनने से यह इलाज आम मरीज़ों की पहुंच में आएगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सेंटर को तैयार होने में कम से कम तीन साल लगेंगे।
कैसे होगी फंडिंग?
परियोजना विश्व बैंक की मदद से चल रहे असम स्टेट सेकेंडरी हेल्थकेयर इनिशिएटिव (ASSIST) के तहत बनेगी। कुल लागत में से ₹315 करोड़ विश्व बैंक के कर्ज़ से और ₹285 करोड़ राज्य सरकार देगी। इस रकम में मशीन, भवन और स्टाफ की ट्रेनिंग शामिल है। सेंटर में IBA का "प्रोटियस वन" (ProteusONE) सिस्टम लगाया जाएगा। कंपनी डॉक्टरों, मेडिकल फिज़िसिस्ट और तकनीशियनों को प्रशिक्षण देगी, और कुछ स्टाफ को विदेश के प्रोटॉन सेंटरों में भी भेजा जाएगा। राज्य ने मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर से भी सहयोग मांगा है।
क्या है प्रोटॉन थेरेपी?
प्रोटॉन बीम थेरेपी रेडिएशन से कैंसर के इलाज की एक उन्नत तकनीक है। इसमें प्रोटॉन कणों की किरण सीधे ट्यूमर को निशाना बनाती है, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतकों पर रेडिएशन का असर कम होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों के कैंसर और दिमाग, आंख या रीढ़ के पास वाले ट्यूमर में यह तकनीक खास तौर पर उपयोगी है। हालांकि हर मरीज़ के लिए यह ज़रूरी नहीं होती; कौन सा इलाज सही है, यह डॉक्टर तय करते हैं।
फिलहाल देश में मुंबई के टाटा मेमोरियल और चेन्नई के अपोलो अस्पताल में ही प्रोटॉन थेरेपी उपलब्ध है। असम का सेंटर देश का तीसरा और पूर्वोत्तर का पहला होगा। इससे झारखंड, बंगाल और बिहार जैसे पूर्वी राज्यों के मरीज़ों को भी भविष्य में नज़दीक विकल्प मिल सकता है। इलाज का शुल्क अभी घोषित नहीं हुआ है।