AI से इलाज का खतरनाक साइड इफेक्ट: अहमदाबाद में 9 महीने में 2,155 लोग हुए बीमार, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी
अहमदाबाद/न्यूयॉर्क:
तकनीक के दौर में चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी जैसे एआई टूल्स पर अंधा भरोसा सेहत पर भारी पड़ने लगा है। बुखार, जुकाम या पेट दर्द जैसी आम परेशानियों में डॉक्टर के पास जाने के बजाय एआई से नुस्खा पूछकर या घर में रखी पुरानी दवाएं खाकर अपनी जान जोखिम में डालने वालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। गुजरात के अहमदाबाद स्थित चार एडीआर (Adverse Drug Reaction) मॉनिटरिंग सेंटरों की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार सालों में खुद से दवा लेने (सेल्फ-मेडिकेशन) के चलते साइड इफेक्ट के 7,267 मामले सामने आ चुके हैं। अकेले 2026 में बीते 9 महीनों के भीतर ही ऐसे 2,155 गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बिना डॉक्टरी परामर्श दवा लेने से जी मिचलाना, तेज पेट दर्द, एसिडिटी, चक्कर आना, गंभीर सिरदर्द, नींद की बीमारी, कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
दवा लेते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां:
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लक्षण एक, बीमारी अलग: एक जैसे लक्षण कई अलग-अलग बीमारियों के हो सकते हैं; इंटरनेट या एआई की अधूरी जानकारी पर दवा न खाएं।
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पिछला पर्चा दोबारा न दोहराएं: एक ही बीमारी दोबारा होने पर भी पुरानी दवा या उसकी पुरानी खुराक कारगर होगी, यह जरूरी नहीं है।
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उम्र और वजन का गणित: एक जैसे लक्षणों के बावजूद मरीज की उम्र, वजन और पुरानी बीमारियों के हिसाब से दवा का असर और डोज अलग होती है।
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एंटीबायोटिक्स का बेजा इस्तेमाल खतरनाक: वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक्स असरदार नहीं होतीं; इनका अनावश्यक इस्तेमाल शरीर में 'एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस' पैदा कर देता है।
सीखने की क्षमता पर भी चोट
उधर, द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से सामने आई एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, एआई जहां प्राइमरी केयर डॉक्टरों को एंटीबायोटिक चुनने और ब्लड रिपोर्ट समझने में मदद कर रहा है, वहीं नए मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों की क्लिनिकल समझ को कमजोर भी कर रहा है। विशेषज्ञों की चिंता है कि शुरुआती करियर में ही एआई चैटबॉट्स के रेडीमेड फैसलों पर अत्यधिक निर्भरता से डॉक्टरों की स्वतंत्र रूप से सोचने और सीखने की स्वाभाविक क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है।