सर्दियों की दस्तक के साथ सर्दी-जुकाम और मौसमी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, यानी इम्युनिटी, को मजबूत कैसे रखा जाए। आयुर्वेद और भारतीय परंपरा मानती है कि इम्युनिटी किसी एक गोली या नुस्खे से नहीं, बल्कि सही दिनचर्या, संतुलित भोजन और शांत मन से बनती है।
दिन की शुरुआत ब्रह्ममुहूर्त से
ashram.org पर संत श्री आशारामजी बापू के सत्संग-साहित्य में सूर्योदय से पहले उठने, गुनगुना पानी पीने, सुबह की धूप लेने और प्राणायाम करने को स्वस्थ जीवन का आधार बताया गया है। आयुर्वेदिक मान्यता है कि नियमित समय पर सोना-जागना शरीर की प्राकृतिक घड़ी को संतुलित रखता है। सुबह 15-20 मिनट धूप में बैठना और हल्का व्यायाम या योग करना ज्यादातर लोगों के लिए सरल और सुरक्षित आदत है।
थाली में क्या हो
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का 'ईट राइट इंडिया' अभियान मौसमी फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और कम नमक-चीनी-तेल वाला भोजन लेने की सलाह देता है। सर्दियों में आंवला, अमरूद, संतरा, गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़ और तिल जैसे मौसमी खाद्य पारंपरिक रूप से पसंद किए जाते हैं। डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी अपने वीडियो और लेखों में ताजे फल, कच्ची सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड से दूरी पर जोर देते हैं। ये उनके सुझाव हैं; किसी बीमारी के इलाज के रूप में इन्हें नहीं अपनाना चाहिए।
घरेलू उपाय, सीमा के साथ
आयुर्वेद में हल्दी वाला दूध, तुलसी-अदरक की चाय, काली मिर्च और शहद जैसे उपाय परंपरा से इस्तेमाल होते आए हैं। लेकिन किसी भी चीज की अधिकता नुकसान कर सकती है। डायबिटीज, बीपी, गर्भावस्था या पहले से दवा ले रहे लोग कोई भी काढ़ा या नुस्खा शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य वैद्य से सलाह लें।
नींद, मन और साफ-सफाई
स्वास्थ्य मंत्रालय भी बार-बार हाथ धोने, साफ पानी पीने, पर्याप्त नींद लेने और तंबाकू-शराब से दूर रहने को बीमारियों से बचाव के बुनियादी उपाय बताता है। 7-8 घंटे की नींद, ध्यान या जप से तनाव कम करना और परिवार के साथ समय बिताना मन को स्वस्थ रखता है, और स्वस्थ मन स्वस्थ शरीर की नींव है।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है, यह चिकित्सा सलाह नहीं है। किसी बीमारी या लक्षण में योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। लेख में दिए गए उपाय किसी रोग का प्रमाणित इलाज नहीं हैं।