अमेरिका-ईरान तनाव से ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार, भारत पर क्या असर?

अमेरिका-ईरान तनाव से ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार, भारत पर क्या असर?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को हिला दिया है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 97 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। कुछ रिपोर्टों में दिन के दौरान ब्रेंट 106 डॉलर से ऊपर भी दर्ज किया गया।

क्यों चढ़े दाम?

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद बाजार में यह आशंका बढ़ गई कि दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई बाधित हो सकती है। दुनिया के समुद्री रास्ते से जाने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान की ओर से भी कहा गया है कि युद्ध खत्म करने का समझौता अभी दूर है। इससे शांति की उम्मीदें कमजोर पड़ीं। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले कूटनीतिक प्रगति की खबरों से तेल में तेज गिरावट आई थी।

भारत के लिए क्यों अहम?

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

  • पेट्रोल-डीजल: अगर ऊंची कीमतें लंबे समय तक टिकीं तो तेल कंपनियों पर दाम बढ़ाने का दबाव बन सकता है।
  • महंगाई: ढुलाई महंगी होने से सब्जी, फल और रोजमर्रा की चीजों के दाम पर असर पड़ सकता है।
  • रुपया: तेल आयात बिल बढ़ने से रुपये पर दबाव आता है।
  • शेयर बाजार: तेल पर निर्भर सेक्टर जैसे एविएशन और पेंट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव दिख सकता है।

आगे क्या?

जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल की चाल पूरी तरह पश्चिम एशिया के हालात पर निर्भर करेगी। अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो कीमतों में नरमी आ सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर दाम और ऊपर जा सकते हैं। फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आम लोगों के लिए राहत की बात यही है कि सरकार और तेल कंपनियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।