झारखंड की राजधानी रांची में कारोबारियों से रंगदारी वसूलने वाले गिरोहों ने अपना तरीका बदल लिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अब ये गिरोह सिर्फ फोन पर धमकी देकर नहीं रुकते, बल्कि रंगदारी न मिलने पर कारोबारियों के घर, दुकान और प्रतिष्ठानों पर फायरिंग तक करवा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि पुलिस की कार्रवाई ज्यादातर शूटरों तक सीमित रह जा रही है, जबकि गिरोह के सरगना अब भी पहुंच से बाहर बताए जा रहे हैं।
युवाओं को 'सैलरी' का लालच
रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह के सरगना कथित तौर पर दूसरे राज्यों या जिलों में छिपकर नेटवर्क चला रहे हैं। वे 20 से 30 साल के युवाओं को हर महीने करीब 40 हजार रुपये तक देने का लालच देकर गिरोह में शामिल करते हैं। इसके बाद उन्हें किसी चिह्नित कारोबारी के ठिकाने पर फायरिंग का काम सौंपा जाता है। वारदात के बाद ये युवा पुलिस की गिरफ्त में आ जाते हैं, जबकि सरगना नए युवकों को जोड़कर नेटवर्क चलाते रहते हैं। इसे 'यूज एंड थ्रो' मॉडल कहा जा रहा है।
किन कारोबारियों को खतरा
- जमीन और कोयला कारोबारी
- ईंट और बालू व्यवसायी
- होटल-रेस्टोरेंट संचालक
- दवा और जेवर व्यवसायी, डॉक्टर
हाल की कार्रवाई
30 अक्टूबर को धुर्वा थाना क्षेत्र में हुई पुलिस मुठभेड़ में राहुल दुबे गिरोह से जुड़े बताए जा रहे एक आरोपी के पैर में गोली लगी। वहीं कांके पुलिस ने रिंग रोड से एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया, जिस पर एक कोयला कारोबारी के घर हुई फायरिंग में शामिल होने का आरोप है। पुलिस के अनुसार कई आरोपियों पर पहली बार ऐसा मामला दर्ज हुआ है, यानी गिरोह नए चेहरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
गिरोह क्यों सक्रिय?
जानकारों के अनुसार इसके पीछे चार बड़ी वजहें मानी जा रही हैं—नए युवकों की भर्ती, हथियारों की आसान उपलब्धता, अपराधियों को भागने के रास्तों की जानकारी और जेल के भीतर से भी नेटवर्क सक्रिय रहने की आशंका। कानून-व्यवस्था के जानकारों का कहना है कि जब तक सरगनाओं और उनके फंडिंग नेटवर्क तक पहुंच नहीं बनेगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा। युवाओं के परिवारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि पैसों के लालच में कोई अपराध के रास्ते पर न जाए।