झूठी FIR दर्ज कराने वालों पर अब सख्ती, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने DGP को जारी करने को कहा दिशा-निर्देश

झूठी FIR दर्ज कराने वालों पर अब सख्ती, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने DGP को जारी करने को कहा दिशा-निर्देश

प्रयागराज। झूठी एफआईआर दर्ज कराकर लोगों को फंसाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले की जांच में आरोप झूठे पाए जाते हैं, तो केवल शिकायतकर्ता ही नहीं, बल्कि उसके गवाहों के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसे मामलों में विवेचना अधिकारी जब अंतिम रिपोर्ट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करे, तो उसके साथ शिकायतकर्ता और गवाहों के विरुद्ध अलग से शिकायत (कंप्लेंट) का प्रारूप भी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस प्रक्रिया की अनदेखी करने वाले पुलिस अधिकारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट भी कार्रवाई से नहीं बच सकेंगे।

पुलिस और न्यायिक अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई

न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने इस मामले में पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिए हैं कि वे अधीनस्थ अधिकारियों के लिए आवश्यक आदेश जारी करें। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच अधिकारी यह निष्कर्ष निकालता है कि कोई अपराध बनता ही नहीं है, तो उसे केवल अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गलत सूचना देने के लिए संबंधित धाराओं के तहत लिखित शिकायत दर्ज कराना भी आवश्यक होगा।

किन धाराओं में होगी कार्रवाई

कोर्ट के अनुसार, पुलिस को गलत सूचना देने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 212 और 217 के तहत शिकायत दर्ज की जानी चाहिए, ताकि धारा 215(1)(ए) के अंतर्गत न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया जा सके। यह व्यवस्था दंड प्रक्रिया संहिता की पूर्ववर्ती धारा 195(1)(ए) के अनुरूप है।

60 दिनों में पालन के निर्देश

हाई कोर्ट ने कहा है कि इस आदेश के अनुपालन में पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को 60 दिनों के भीतर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो संबंधित विवेचना अधिकारी, थाना प्रभारी, सर्किल अधिकारी सहित पुलिस एवं न्यायिक अधिकारियों के आचरण के खिलाफ हाई कोर्ट में कार्यवाही की जा सकती है।

मजिस्ट्रेट को दिए गए विशेष निर्देश

कोर्ट ने सभी न्यायिक मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया है कि जब किसी अभियुक्त के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाए, तो वे पूरी केस डायरी तलब करें। साथ ही, जांच अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्ति और उसमें दर्ज गवाहों के खिलाफ भी विधि अनुसार लिखित शिकायत प्रस्तुत की जाए।

हाई कोर्ट के इस फैसले को झूठे मुकदमों पर रोक लगाने की दिशा में एक अहम और दूरगामी कदम माना जा रहा है।