लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े लव जिहाद, यौन शोषण और कथित मतांतरण के गंभीर आरोपों को लेकर अब जांच की कमान स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने संभाल ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया, जिसके तहत विश्वविद्यालय स्तर पर गठित सभी आंतरिक जांच समितियों को भंग कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने सोमवार को कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद को अब तक की जांच रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आगे की पूरी जांच STF से कराए जाने की सिफारिश की गई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
STF ने शुरू की जांच, रिकॉर्ड खंगाले
STF की टीम सोमवार को केजीएमयू परिसर पहुंची और मामले से जुड़े दस्तावेजों, विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित फाइलों की जांच शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा अब केवल मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन लोगों की भूमिका भी खंगाली जाएगी, जिन्होंने कथित रूप से आरोपी को संरक्षण या सहयोग दिया।
आरोपी रेजिडेंट के सहयोगियों पर बढ़ सकती है कार्रवाई
महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने पहले ही पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष और कुछ संकाय सदस्यों पर पीड़ित रेजिडेंट पर दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। ऐसे में STF अब आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक के कथित मददगारों पर भी शिकंजा कस सकती है।
विशाखा कमेटी की रिपोर्ट पहले ही सौंप दी गई
यौन शोषण के आरोपों की जांच कर रही विशाखा कमेटी ने 10 जनवरी को अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में आरोपी का दाखिला रद्द करने की सिफारिश की गई थी। वहीं मतांतरण के आरोपों की जांच के लिए पूर्व डीजी भावेश सिंह की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित की गई थी, जिसने अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपते हुए STF जांच की आवश्यकता जताई।
मुख्यमंत्री से मिलीं कुलपति
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम, अब तक की जांच और विश्वविद्यालय द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया कि केजीएमयू की गरिमा, सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।