बागेश्वर धाम से भाईचारे की तस्वीर, दोस्ती ने तोड़ी मजहब की दीवारें

बागेश्वर धाम से भाईचारे की तस्वीर, दोस्ती ने तोड़ी मजहब की दीवारें

छतरपुर जब देश में अक्सर धर्म और समुदायों के नाम पर तनाव की खबरें सुर्खियां बनती हैं, ऐसे समय में मध्यप्रदेश के बागेश्वर धाम से सामने आया एक दृश्य समाज को नई दिशा दिखाता नजर आया। यहां इंसानियत, मित्रता और आपसी सम्मान ने मजहब की सीमाओं को पीछे छोड़ दिया।

बागेश्वर धाम के दरबार में उस वक्त सभी भावुक हो गए, जब फरहान नाम का एक मुस्लिम युवक अपने तीन हिंदू मित्रों के साथ पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के समक्ष पहुंचा। दोस्तों के बीच आपसी लगाव और विश्वास को देखकर महाराज ने खुले मंच से उनकी प्रशंसा की और फरहान को हनुमान चालीसा के पाठ में सहभागी बनने का स्नेहपूर्ण निमंत्रण दिया।

फरहान और उसके मित्रों की दोस्ती इस बात का प्रतीक बनी कि आस्था दिल से जुड़ती है, किसी पहचान से नहीं। इस दृश्य ने यह संदेश दिया कि सच्चा भाईचारा ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

दरबार के दौरान बातचीत में जब फरहान ने अपने सपनों और भविष्य की योजनाओं का जिक्र किया, तो पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उसे पूरी लगन से पढ़ाई करने और एक सफल डॉक्टर बनने का आशीर्वाद दिया। यह पल वहां मौजूद श्रद्धालुओं के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।

सनातन धर्म की ओर बढ़ा एक और कदम

इसी बीच बागेश्वर धाम से जुड़ा एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के आमगांव में आयोजित श्री रामायण एवं हनुमान चालीसा कथा के दौरान गोंदिया निवासी परवीन मौसिम शेख ने अपने दो बच्चों — बेटे रज़ा और बेटी जुमेरा — के साथ स्वेच्छा से सनातन धर्म को अपनाया।

कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीनों को मंच पर आमंत्रित कर तिलक लगाया, माला पहनाई और उन्हें हिंदू धर्म में सम्मानपूर्वक स्वागत किया। यह दृश्य श्रद्धा, आस्था और व्यक्तिगत निर्णय की आज़ादी का प्रतीक बना।