व्यासपीठ से युगल शरण जी महाराज का बयान: ‘बिना सोशल मीडिया के बापू जी ने लाखों को धर्म से जोड़ा’

व्यासपीठ से युगल शरण जी महाराज का बयान: ‘बिना सोशल मीडिया के बापू जी ने लाखों को धर्म से जोड़ा’

धार्मिक प्रवचन के दौरान प्रसिद्ध संत युगल शरण जी महाराज ने व्यासपीठ से संत श्री आसाराम जी बापू के धार्मिक और सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज समाज में जो धार्मिक जागरूकता दिखाई देती है, उसकी नींव उस दौर में पड़ी थी, जब न तो सोशल मीडिया था और न ही डिजिटल माध्यमों का प्रभाव।

महाराज जी ने कहा कि वर्तमान समय में कथाओं और धार्मिक आयोजनों में उमड़ने वाली भीड़ के पीछे सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है, लेकिन बापू जी के समय में बिना किसी तकनीकी साधन के उन्होंने लाखों लोगों को धर्म से जोड़ा। उनके प्रयासों से घर-घर में “हरि ओम” का जाप और संस्कारों की अलख जगी।

‘नाम और प्रणाम’ का संदेश

प्रवचन में युगल शरण जी महाराज ने बताया कि संत श्री आसाराम जी बापू का मूल उपदेश “नाम और प्रणाम” था—भगवान के नाम का स्मरण और माता-पिता व बड़ों के प्रति सम्मान। उन्होंने कहा कि बापू जी द्वारा लिखी गई संस्कार आधारित पुस्तकें बच्चों के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं।

सद्गुरु का महत्व

महाराज जी ने गुरु की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाहरी अंधकार को तो प्रकाश से दूर किया जा सकता है, लेकिन आंतरिक अंधकार को केवल सद्गुरु ही दूर कर सकते हैं। सद्गुरु वही है, जो शिष्य के भीतर चेतना का दीप प्रज्वलित कर दे।

गौ सेवा और गुरु आज्ञा का उदाहरण

प्रवचन के दौरान एक शिष्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि गुरु की एक छोटी-सी आज्ञा भी जीवन की दिशा बदल सकती है। गौ सेवा से जुड़ा उदाहरण देते हुए कहा गया कि आज सैकड़ों गायों की सेवा गुरु कृपा से संभव हो पाई है।

संस्कार, विनम्रता और कृपा

युगल शरण जी महाराज ने कहा कि कृपा अहंकार से नहीं, बल्कि विनम्रता से प्राप्त होती है। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि जैसे झुका हुआ पात्र जल्दी भरता है, वैसे ही जो व्यक्ति संतों और बड़ों के सामने झुकता है, उस पर कृपा बरसती है।

पाश्चात्य संस्कृति पर टिप्पणी

उन्होंने वैलेंटाइन डे की अवधारणा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दिखावटी प्रेम पर आधारित है, जबकि संत श्री आसाराम जी बापू ने समाज को वैकल्पिक दिशा देते हुए 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाने का संदेश दिया।

धर्म और षड्यंत्र पर विचार

प्रवचन के अंतिम चरण में महाराज जी ने कहा कि संत श्री आसाराम जी बापू के खिलाफ जो घटनाक्रम सामने आए, उसे वे धर्म के विरुद्ध रची गई साजिश के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि जब देश में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा था, उस समय बापू जी ने लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का कार्य किया।

महाराज जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे संतों द्वारा बताए गए मार्ग पर चलते हुए भगवान के नाम का स्मरण करें और अपने संस्कारों को कभी न छोड़ें।