खुर्जा (बुलंदशहर)।
प्रसिद्ध कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा है कि यदि समाज में बहन-बेटियों की अस्मिता पर आघात हो और इसके बावजूद लोगों का जमीर न जागे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह बात जंक्शन मार्ग स्थित शारदा जैन अतिथि भवन में आयोजित मीरा चरित्र कथा के दौरान कही।
श्री कुंज बिहारी सेवा परिकर के वार्षिकोत्सव में शामिल होने पहुंचे देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जब समाज के लोग मारे जाएं या महिलाओं के सम्मान पर हमला हो, और फिर भी चुप्पी बनी रहे, तो यह मानवता के लिए शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने समाज को भड़काकर दूसरों के समाज को नुकसान पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं, जबकि सनातनी समाज अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए भी संगठित नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा, “अगर कोई समाज को जलाने का प्रयास कर रहा है, तो हमें उसे बचाने के लिए खड़ा होना चाहिए। यह कैसी समानता है कि एक पक्ष नुकसान पहुंचाए और दूसरा पक्ष चुप रहे।”
देवकीनंदन ठाकुर ने बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हिंदू समाज की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है और ऐसे में हिंदुओं को अपनी रक्षा का संकल्प लेना होगा।
कथा वाचक ने कहा कि कथा करना उनका कर्तव्य है, लेकिन जब समाज को जलते, लुटते और मरते हुए देखते हैं, तो हृदय व्यथित हो जाता है। उन्होंने धार्मिक प्रतीक का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान जहां बंसी बजाते हैं, वहीं धर्म की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र भी उठाते हैं।
उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों को लेकर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि किसी सनातनी युवक को तिलक लगाने से रोका जाता है, तो यह समानता नहीं कही जा सकती। समानता तभी होती है जब सभी के साथ एक जैसा व्यवहार हो।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान समय-समय पर धर्म की रक्षा के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। उन्होंने सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि हजार वर्षों बाद भी सोमनाथ मंदिर का अस्तित्व बना रहा और आज राम मंदिर का निर्माण हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी पुनर्निर्माण होगा।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि हिंदू राष्ट्र, सनातन राष्ट्र और बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए सभी को मिलकर अभी से प्रयास शुरू करने होंगे, ताकि सनातनी समाज हर क्षेत्र में सुरक्षित और सशक्त बना रह सके।