मुंबई: नवी मुंबई के खारघर में ‘हिंद दी चादर’ कार्यक्रम के तहत गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी समागम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित रहे।
धर्मांतरण पर जताई चिंता
अपने संबोधन में अमित शाह ने पंजाब में कथित रूप से बढ़ रहे धर्मांतरण के मामलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज और सरकार को मिलकर इस प्रवृत्ति को रोकने के प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने दूसरों के धर्म और आस्था की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था, इसलिए समाज को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
अमित शाह ने कहा कि “यदि हम किसी लालच या दबाव में धर्म परिवर्तन करते हैं, तो हम अपने महान पूर्वजों की परंपरा के अनुरूप नहीं चल रहे होते।” उन्होंने पंजाब सरकार से भी इस विषय पर ध्यान देने की अपील की।
गुरु तेग बहादुर के बलिदान का स्मरण
गृह मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि गुरु तेग बहादुर ने अत्याचारों का सामना करते हुए भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है।
औरंगजेब का उल्लेख
अमित शाह ने अपने भाषण में मुगल शासक औरंगजेब का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक कथाओं के अनुसार कश्मीरी पंडितों ने अत्याचारों के समय गुरु तेग बहादुर से संरक्षण की अपील की थी। उन्होंने कहा कि गुरु ने अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का संदेश दिया।
देवेंद्र फडणवीस का संबोधन
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास के कठिन दौर में गुरु तेग बहादुर ने समाज को साहस और विश्वास प्रदान किया। उन्होंने गुरु के बलिदान को धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा का प्रतीक बताया।