NEET पेपर लीक

NEET पेपर लीक

नीट (NEET) पेपर लीक की इनसाइड स्टोरी: साइबर एक्सपर्ट ने खोला कच्चा-चिट्ठा, ऐसे होती है सुरक्षा में सेंधमारी

लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक मामले में साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेटर अमित दुबे ने पूरी प्रक्रिया का पर्दाफाश किया है। आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा, जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग और लॉक सिस्टम के बावजूद पेपर लीक कैसे हो जाता है? इसका जवाब तकनीक की कमी में नहीं, बल्कि मानवीय लालच और सिस्टम की खामियों में छिपा है।

'चेन ऑफ कस्टडी' (Chain of Custody) में सेंध

अमित दुबे के अनुसार, किसी भी पेपर को बनाने से लेकर बांटने तक की प्रक्रिया को 'चेन ऑफ कस्टडी' कहते हैं। पेपर सेट करने वालों से लेकर प्रिंटिंग प्रेस तक बहुत गोपनीयता बरती जाती है। प्रिंटिंग के बाद पेपर जीपीएस निगरानी वाली गाड़ियों से परीक्षा केंद्रों (लगभग 500 सेंटर) तक पहुंचते हैं। असली खेल परीक्षा केंद्र पर पेपर पहुंचने के बाद शुरू होता है।

ऐसे दिया जाता है वारदात को अंजाम:

  • अंतिम मिनटों का खेल: परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले जब ऑब्जर्वर की मौजूदगी में सील बंद बॉक्स खोले जाते हैं और पेपर बांटने के लिए निकाले जाते हैं, लीक की सबसे ज्यादा गुंजाइश वहीं होती है।
  • स्पाई कैमरों का इस्तेमाल: आज के समय में मोबाइल के अलावा बटन कैमरा या कस्टमाइज्ड सर्विलांस डिवाइस बहुत आसानी से उपलब्ध हैं। इन्हीं छुपे हुए डिवाइस से 2-5 मिनट के अंदर पेपर की फोटो खींचकर सर्कुलेट कर दी जाती है।
  • सॉल्वर गैंग का नेटवर्क: फोटो बाहर बैठे एक 'सॉल्वर सिस्टम' या गैंग के पास पहुंचती है। परीक्षा शुरू होने के 15-20 मिनट बाद ही अंदर बैठे कुछ चुनिंदा छात्रों तक उनके आंसर्स (Answers) पहुंचा दिए जाते हैं। नासिक जैसे सेंटर्स से पकड़े गए लोगों के मामले में यही तरीका सामने आया था।

क्या पेपर बहुत पहले ही लीक हो गया था?

जांच में यह भी सामने आया है कि इस बार केमिस्ट्री के 120 सवाल और पूरे पेपर के करीब 410 सवाल पहले से ही हूबहू मैच कर रहे थे। इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ सेंटर पर ही फोटो नहीं खींची गई, बल्कि प्रक्रिया के किसी शुरुआती हिस्से (जैसे प्रिंटिंग या लॉजिस्टिक्स) में भी बड़ी सेंधमारी हुई थी।

क्यों नहीं रुक रहे पेपर लीक?

एक्सपर्ट का साफ मानना है कि जब तक किसी एक व्यक्ति की जवाबदेही (Accountability) तय नहीं होगी, ये धंधा चलता रहेगा। यह हजारों करोड़ का एक ऐसा बिजनेस है जिसमें शामिल लोगों को कानून का कोई खास डर नहीं है। यूपीएससी (UPSC) या सीए (CA) जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक नहीं होते क्योंकि वहां सिस्टम सख्त है। जब तक पेपर लीक करने वालों को 20 साल की कड़ी सजा का खौफ नहीं होगा, तब तक 22 लाख छात्रों की मेहनत और भविष्य के साथ ऐसा ही खिलवाड़ होता रहेगा।