प्रयागराज माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मुद्दे पर योगी सरकार के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सरकार न तो उन्हें शंकराचार्य मानती है और न ही ऐसे किसी धार्मिक पद को मान्यता देती है।
बरेली दौरे के दौरान गोतस्करी और गोरक्षा से जुड़े सवालों पर जवाब देते हुए मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद तथ्यों से अनभिज्ञ हैं और जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धार्मिक पद की आड़ में कानून व्यवस्था को चुनौती देना चाहते हैं, जिसे योगी सरकार किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।
‘शंकराचार्य कोई सरकारी पद नहीं’
धर्मपाल सिंह ने दो टूक कहा कि शंकराचार्य कोई संवैधानिक या सरकारी पद नहीं है, इसलिए सरकार किसी को शंकराचार्य घोषित नहीं करती। मठों और परंपराओं का अपना अलग धार्मिक ढांचा है, जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक पहचान का इस्तेमाल राजनीति या अराजकता फैलाने के लिए नहीं किया जा सकता।
गोरक्षा पर जीरो टॉलरेंस – योगी सरकार का दावा
मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि 2017 में सत्ता संभालते ही अवैध स्लॉटर हाउसों पर कार्रवाई सरकार की पहली प्राथमिकता रही।
योगी सरकार के कार्यकाल में हजारों अवैध स्लॉटर हाउस बंद किए गए हैं और उत्तर प्रदेश में गोहत्या व गोमांस पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में केवल भैंस, सूअर और बकरे के मांस की अनुमति है, वह भी तय नियमों के अंतर्गत। गोहत्या के मामलों में सरकार ने NSA जैसी कड़ी धाराओं तक का इस्तेमाल किया है, और कई आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हैं।
‘आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’
धर्मपाल सिंह ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है—आस्था के नाम पर कानून तोड़ने वालों को कोई संरक्षण नहीं मिलेगा। धार्मिक पद की आड़ में भ्रम या तनाव फैलाने वालों को सरकारी मान्यता नहीं दी जा सकती।
सरकार का फोकस केवल कानून व्यवस्था, शांति और सामाजिक संतुलन बनाए रखने पर है। किसी भी प्रकार के विवादित धार्मिक दावे या सार्वजनिक टकराव से सरकार दूरी बनाए रखेगी।
सरकार का स्टैंड साफ
योगी सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि—
अविमुक्तेश्वरानंद को सरकार ने शंकराचार्य के रूप में मान्यता नहीं दी है
धार्मिक पद सरकार नहीं बांटती
कानून तोड़ने की किसी को छूट नहीं
गोरक्षा पर कोई समझौता नहीं
इस बयान के बाद साफ है कि अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहा विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक-धार्मिक बहस को जन्म दे सकता है।