पानीपत: पानीपत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबरदीप सिंह की अदालत में चल रहे हत्या के प्रयास के मामले में पीड़ित महेंद्र सिंह चावला को उस समय झटका लगा, जब अदालत ने उनके द्वारा दाखिल की गई वह अर्जी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अहम दस्तावेजों को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति मांगी थी।
यह मामला एफआईआर संख्या 243/2015, थाना सदर पानीपत से जुड़ा है, जिसमें नारायण साई, निशांत राज घंगास समेत अन्य आरोपियों पर हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, धमकी और शस्त्र अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा चल रहा है।
क्या थी पीड़ित की मांग
पीड़ित महेंद्र चावला ने अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 (अब BNSS 2023 की धारा 348) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 (अब BSA 2023 की धारा 60) के तहत आवेदन दाखिल कर यह मांग की थी कि वे पुलिस और प्रशासन को समय-समय पर दी गई अपनी शिकायतों, आरटीआई से प्राप्त प्रमाणित दस्तावेजों, ऑडियो रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट और अन्य अहम पत्राचार को अदालत की फाइल में पेश कर सकें।
पीड़ित का कहना था कि ये दस्तावेज यह साबित करते हैं कि उसे लंबे समय से नारायण साई और आशाराम बापू से जुड़े मामलों में गवाही देने के कारण जान का खतरा था और हत्या का प्रयास पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा था।
कोर्ट ने क्यों नहीं मानी अर्जी?
अदालत ने पीड़ित की उक्त अर्जी को स्वीकार नहीं किया और यह कहते हुए गवाही दर्ज कराने का आदेश दिया कि ट्रायल को आगे बढ़ाया जाए। इसके बाद महेंद्र चावला की गवाही अदालत में दर्ज की गई।
हाईकोर्ट से मिल चुकी थी छूट
गौरतलब है कि इससे पहले महेंद्र चावला ने इसी मामले में धारा 91 CrPC के तहत भी आवेदन दायर किया था, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2025 के आदेश में उन्हें धारा 311 के तहत ट्रायल कोर्ट में दोबारा आवेदन करने की स्वतंत्रता दी थी, जिसके बाद यह अर्जी दाखिल की गई थी।
पीड़ित पक्ष की दलील
पीड़ित पक्ष का कहना है कि जिन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति मांगी गई थी, वे पहले ही पुलिस और प्रशासन को सौंपे जा चुके थे, लेकिन जांच एजेंसी ने उन्हें चालान का हिस्सा नहीं बनाया। ऐसे में इन दस्तावेजों को पेश किए बिना गवाही दर्ज होना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
अगली सुनवाई 6 फरवरी को
अदालत ने गवाही की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए मामले में अगली तारीख 6 फरवरी तय की है। इस दिन भी पीड़ित पक्ष की गवाही से जुड़ी आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।