न्याय व्यवस्था की सख्ती का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है, जहां एक छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। 46 पन्नों के विस्तृत फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश ने प्रतीकात्मक रूप से अपनी कलम की निब भी तोड़ दी।
कैसे हुआ जघन्य अपराध
यह दिल दहला देने वाली घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में सामने आई थी। आरोपी अमित रैकवार ने स्कूल से घर लौट रही छह साल की बच्ची को गुटखा लाने के बहाने रोका और उसे अपने घर ले गया। वहां उसने मासूम के साथ अमानवीय कृत्य किया।
मेडिकल रिपोर्ट ने खोले राज
पुलिस और मेडिकल जांच में सामने आया कि पीड़िता के शरीर पर दांतों के काटने के कई निशान थे और गंभीर आंतरिक चोटें भी पाई गईं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट ने अपराध की बर्बरता की पुष्टि की।
त्वरित कार्रवाई में गिरफ्तार हुआ आरोपी
घटना के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए देर रात मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तीन दिन के भीतर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 7 अक्टूबर 2025 को पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और भारतीय नवीन दंड संहिता की कई धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की।
56 दिन में निपटा मामला
12 नवंबर को आरोप तय होने के साथ ही मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। महज 56 दिनों में अदालत ने पूरे मामले का निपटारा कर दिया। सुनवाई के दौरान कुल 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें डॉक्टरों की टीम, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, डीएनए रिपोर्ट और पीड़िता से जुड़े अहम बयान शामिल थे।
रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना गया केस
बचाव पक्ष ने साक्ष्यों की कमी का दावा किया, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। सरकारी वकील कमल सिंह ने इस अपराध को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” बताते हुए कहा कि आरोपी ने मासूम को बहलाकर सुनियोजित तरीके से अपराध को अंजाम दिया। अदालत ने उनकी दलील से सहमति जताते हुए फांसी की सजा सुनाई।
पुलिस कार्रवाई की सराहना
पुलिस अधीक्षक पलास बंसल ने जांच टीम की सराहना करते हुए कहा कि समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के चलते पीड़िता को न्याय मिल सका।
यह फैसला न सिर्फ पीड़िता के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि समाज को यह सख्त संदेश भी देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।