वाराणसी। मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और धार्मिक विमर्श का विषय बन गया है। इस बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा गौ-रक्षा के मुद्दे पर आंदोलन और लखनऊ कूच के ऐलान के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
उधर, उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यदि जगद्गुरु शंकराचार्य लखनऊ आते हैं तो एक राम भक्त के नाते वे उनका स्वागत करेंगे।
7 मार्च से यात्रा, 11 मार्च को विद्वत सभा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की है कि वे 7 मार्च को वाराणसी स्थित श्रीविद्या मठ से प्रस्थान करेंगे। 10 मार्च को सिधौली और इटौंजा होते हुए लखनऊ पहुंचेंगे। 11 मार्च को शीतलाअष्टमी के अवसर पर आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर विद्वत सभा आयोजित की जाएगी।
गौ-रक्षा के मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पहले भी राज्य सरकार से नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
पहले भी दे चुके हैं बयान
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इससे पहले भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सम्मानजनक संबोधन देते हुए बयान दे चुके हैं। जनवरी में माघ मेले के दौरान स्नान को लेकर हुए विवाद में भी उन्होंने शंकराचार्य से संवाद कर समाधान की अपील की थी।
अखिलेश यादव पर भी टिप्पणी
इस मुद्दे पर बोलते हुए डिप्टी सीएम ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के समर्थन में दिए जा रहे बयानों के पीछे राजनीतिक मंशा हो सकती है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी की ओर से अलग रुख सामने आया है।
सियासी हलचल जारी
गौ-रक्षा और धार्मिक मुद्दों को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। शंकराचार्य की प्रस्तावित यात्रा और डिप्टी सीएम के बयान के बाद यह मुद्दा आगामी दिनों में और चर्चा में रह सकता है।
प्रशासन की ओर से अब तक यात्रा को लेकर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।