लव जिहाद और धार्मिक धर्मांतरण को लेकर साध्वी हर्षा रिछारिया के हालिया बयान ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। प्रयागराज से शुरू हुई उनकी ‘शक्ति सृजन यात्रा’ के दौरान दिए गए वक्तव्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
हर्षा रिछारिया ने कहा कि यदि बेटियों को भारत के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और वीरांगनाओं के बलिदान की जानकारी नहीं दी गई, तो उन्हें गुमराह करना आसान हो जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि सांस्कृतिक जड़ों से कटती युवा पीढ़ी के कारण लव जिहाद और धर्मांतरण जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
शनिवार को यात्रा की शुरुआत के मौके पर उन्होंने कहा कि अगर नई पीढ़ी को रानी पद्मावती के जौहर, रानी दुर्गावती, झलकारी बाई और रानी लक्ष्मीबाई जैसे ऐतिहासिक उदाहरणों से परिचित नहीं कराया गया, तो वे गलत प्रभावों में आ सकती हैं और अपनी परंपराओं से दूर हो सकती हैं।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, हर्षा रिछारिया ने कटरा में आयोजित देवी कथा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युवाओं से अपनी संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज और परिवार की जिम्मेदारी है कि वे बेटियों को सही दिशा दें और लव जिहाद जैसे मामलों से सतर्क रखें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘शक्ति सृजन यात्रा’ का उद्देश्य महिलाओं और युवतियों में आत्मबोध और आत्मबल जगाना है। उनके अनुसार, हर महिला के भीतर दिव्य शक्ति निहित है, जिसे पहचानकर वह सकारात्मक जीवन पथ चुन सकती है।
दुर्गा सप्तशती का उल्लेख करते हुए साध्वी हर्षा ने कहा कि नारी के दो स्वरूप होते हैं—सौम्य और उग्र। सौम्य स्वरूप स्नेह और करुणा का प्रतीक है, जबकि उग्र स्वरूप अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की शक्ति देता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में नारी शक्ति का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों को फंसाने की घटनाएं समाज के लिए चिंताजनक हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है।
प्रयागराज से यात्रा की शुरुआत को लेकर उन्होंने कहा कि यह भूमि ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है और यहां से हर शुभ कार्य का आरंभ होना परंपरा रही है। इसी कारण ‘शक्ति सृजन यात्रा’ की शुरुआत प्रयागराज से की गई।
हर्षा रिछारिया ने आगे कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम माघ मेले और देश के अन्य हिस्सों में भी आयोजित किए जा सकते हैं। उनका मानना है कि यदि ऐसे आयोजनों से कुछ युवा भी सही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो यह प्रयास सफल माना जाएगा।
उनके मुताबिक, यह यात्रा समाज में संस्कार, आत्मबल और दिशा देने का एक प्रयास है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भ्रम और भटकाव से बच सकें।