सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: धर्म बदलते ही खत्म होगा पुरानी जाति का आरक्षण, हिंदू से मुस्लिम बनने पर नहीं मिलेगा OBC कोटा!
नई दिल्ली: धर्मांतरण और आरक्षण के अधिकार को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी पूर्व जाति के आधार पर मुस्लिम पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का दावा कतई नहीं कर सकता।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 16(4) की व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन से पहले का सामाजिक पिछड़ापन किसी दूसरे धर्म में आरक्षण पाने का स्वतः आधार नहीं बन सकता। अदालत ने यह भी साफ किया कि किसी निजी धार्मिक संस्था द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी पात्रता का अंतिम पैमाना नहीं माना जाएगा।
हाई कोर्ट का फैसला बरकरार, 'घर वापसी' पर भी स्वतः बहाल नहीं होगा कोटा
अदालत ने कहा कि एससी (SC) दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के पात्र समुदायों को ही मिलता है; इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति अपनी पुरानी पहचान के आधार पर अनुसूचित जाति आरक्षण का पात्र नहीं रह जाता। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति पुनः हिंदू धर्म में लौटता भी है, तो पुरानी जाति का आरक्षण अपने आप बहाल नहीं होगा; सक्षम अधिकारी बाकायदा उसकी पात्रता की जांच करेंगे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस फैसले से मुस्लिम समुदायों को पहले से मिल रहा पिछड़ा वर्ग आरक्षण प्रभावित नहीं होगा।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तमिलनाडु के समीर अहमद (पूर्व नाम परमशिवम) से जुड़ा है। परमशिवम ने साल 2015 में हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर लिया था और बाद में उन्होंने मुस्लिम 'लब्बाई' समुदाय के तहत पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र की मांग की थी। तहसीलदार द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा।
राज्य सरकार ने 9 मार्च 2024 को एक आदेश जारी कर धर्म बदलने वाले पिछड़ा, अति पिछड़ा, विमुक्त और एससी वर्ग के लोगों को मुस्लिम पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था की थी, जिसे हाई कोर्ट ने जून 2026 में रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी अब इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।