इंदौर का हेड कांस्टेबल फिरोज खान के पास वेतन से 40 गुना ज्यादा अकूत संपत्ति, ₹30 करोड़ का मालिक!

इंदौर का हेड कांस्टेबल फिरोज खान के पास वेतन से 40 गुना ज्यादा अकूत संपत्ति, ₹30 करोड़ का मालिक!

खाकी की आड़ में अकूत दौलत का साम्राज्य: 24 साल की नौकरी, 75 लाख का वेतन... पर हेड कांस्टेबल फिरोज निकला ₹30 करोड़ का मालिक!

इंदौर: मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का एक ऐसा चौंकाने वाला कारनामा उजागर हुआ है, जिसे देखकर बड़े-बड़े रईस भी दंग रह जाएं। इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में पदस्थ हेड कांस्टेबल ड्राइवर फिरोज खान के ठिकानों पर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। लोकायुक्त की संयुक्त टीमों ने बुधवार सुबह इंदौर और देवास स्थित उसके 15 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा, जिसमें अब तक 29.73 करोड़ रुपये से अधिक की 33 बेनामी संपत्तियां सामने आई हैं।

वेतन से 40 गुना ज्यादा अकूत संपत्ति

साल 2002 में पुलिस सेवा में आए फिरोज खान ने 24 वर्षों की नौकरी के दौरान वेतन के रूप में करीब 75 लाख रुपये और अन्य स्रोतों समेत कुल 1.93 करोड़ रुपये कमाए। लेकिन जांच में उसके पास कुल आय से 40 गुना अधिक यानी लगभग ₹30 करोड़ की चल-अचल संपत्ति का पर्दाफाश हुआ है। लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय और डीएसपी सुनील तालान के अनुसार, आरोपी के पास से 9 लग्जरी वाहन, 21 बैंक खाते, आलीशान बंगले, कई फ्लैट्स और बीघा भर कृषि भूमि के दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

मां, पत्नी और महिला मित्र के नाम काली कमाई

काली कमाई को छिपाने के लिए फिरोज ने पूरा सिंडिकेट बना रखा था। उसने अपनी मां वहीदा खान, पत्नी और महिला मित्र रोशनी वर्मा के नाम पर देवास और इंदौर के पॉश इलाकों में दर्जनों प्लॉट व फ्लैट्स खरीदे। आरोपी ने परिजनों के नाम पर 'साहिल ट्रेडिंग' और 'रॉयल ग्रीन' जैसी फर्जी फर्में बनाई थीं, जबकि सह-आरोपी महिला मित्र 'रोशनी सेल्स एंड सर्विस' फर्म संचालित कर रही थी, जिनके जरिए करोड़ों का संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किया गया।

वर्दी की धौंस दिखाकर कब्जाई विवादित जमीनें

जांच में खुलासा हुआ है कि फिरोज खान पुलिस की धौंस दिखाकर देवास व इंदौर के ग्रामीण इलाकों में विवादित जमीनों के सौदों में दखल देता था और औने-पौने दामों में एग्रीमेंट करा लेता था। सांवेर के ग्राम गुरान में भी उसने जमीन विवाद का फायदा उठाकर 21.75 बीघा से अधिक कृषि भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट परोक्ष रूप से अपनी महिला मित्र के नाम करवाया था। छापे के वक्त आरोपी घर से नदारद मिला और टीम के फोन करने पर भी हाजिर नहीं हुआ।