नई दिल्ली।
लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती सहित 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही मामले में अब नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अदालत के अनुसार, मामले के आरोप गंभीर हैं और इसकी विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।
क्या हैं आरोप
सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई। यह जमीन नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से बेहद कम कीमत पर लेकर लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम ट्रांसफर कराई गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, कई मामलों में जमीन बाजार मूल्य से एक चौथाई या पांचवें हिस्से की कीमत पर ली गई या गिफ्ट के रूप में दिखाई गई। कुल मिलाकर लगभग एक लाख वर्ग फुट जमीन करीब 26 लाख रुपये में ली गई, जबकि इसकी वास्तविक कीमत 4 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों के बीच आपराधिक साजिश के स्पष्ट संकेत मिलते हैं और लालू यादव व उनके परिवार ने एक संगठित तरीके से काम किया। अदालत ने लालू यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए हैं, वहीं परिवार के अन्य सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं में भी मुकदमा चलेगा।
आगे क्या
सीबीआई अब अदालत के सामने अपने गवाहों और सबूतों को पेश करेगी। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की गई है।
वहीं, सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।