नई दिल्ली | 18 मार्च, 2026
देश में लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव का आगाज़ हो चुका है। भारत निर्वाचन आयोग ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया मार्च के अंत से शुरू होकर अप्रैल के अंत तक चलेगी, जबकि सभी राज्यों के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। आयोग ने सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को ध्यान में रखते हुए चुनाव को चरणों में आयोजित करने का निर्णय लिया है।
प्रमुख तारीखें और चरण
तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। इसी दिन असम में भी मतदान होगा। वहीं, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिस्थितियों और सुरक्षा कारणों को देखते हुए दो चरणों में वोटिंग होगी, जिसकी तारीखें 23 अप्रैल और 29 अप्रैल निर्धारित की गई हैं। सभी राज्यों के मतों की गिनती 4 मई 2026 को की जाएगी।
चुनाव के प्रमुख मुद्दे
इस बार के विधानसभा चुनाव कई महत्वपूर्ण मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। समान नागरिक संहिता (UCC) एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरा है, खासकर उन राज्यों में जहां विपक्षी दल सत्ता में हैं। इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती गैस कीमतें भी चुनावी बहस के केंद्र में हैं।
दक्षिण भारत में क्षेत्रीय अस्मिता, भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। क्षेत्रीय दल इन मुद्दों को लेकर काफी आक्रामक नजर आ रहे हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
डिजिटल और AI की नई चुनौती
2026 के चुनावों में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी कंटेंट को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हर जिले में डिजिटल ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति की गई है, जो ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “हमारा उद्देश्य पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराना है। आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है और किसी भी उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
सियासी समीकरणों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इन पांच राज्यों के चुनाव न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यह एक बड़ा राजनीतिक संकेत होगा। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा, जिससे देश के सियासी नक्शे में बदलाव संभव है।
(समाप्त)