नई दिल्ली : बापू आसाराम जी के स्वास्थ्य, जेल में उनके साथ कथित प्रताड़ना और रिहाई की मांग को लेकर विभिन्न हिंदू एवं सामाजिक संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में हिंदू संत आसाराम जी बापू को कथित रूप से प्रताड़ित करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने तथा कानून और संविधान के प्रावधानों के अनुसार उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि 6 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया पर हिन्दू संत आसारामजी बापू की जेल में स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत गंभीर होने और उनके साथ कथित प्रताड़ना की खबरें सामने आई हैं। संगठनों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जेल में न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में ऐसे अधिकारियों को पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में उम्रदराज कैदियों की रिहाई से संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 18 जुलाई 2018 को कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 474 और भारतीय दंड संहिता की धारा 55 के प्रावधानों पर विचार किया जाना चाहिए। संगठनों का कहना है कि इन कानूनी प्रावधानों के अनुरूप संत आसाराम जी बापू और उनके सुपुत्र संत नारायण साईं की रिहाई के मामले पर भी विचार किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में आतंकवादियों और नक्सलियों की समय से पहले रिहाई के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया गया है कि उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए हिन्दू संत आसाराम जी बापू तथा नारायण साईं के मामले में कानून के प्रावधानों के अनुसार राहत क्यों नहीं दी जा रही है।
संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करने की अपील की है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि न्यायिक स्तर पर उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया तो हिंदू संगठन आगे अपनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे।
इन संगठनों एवं प्रतिनिधियों ने उठाई मांग
ज्ञापन पर मानिक देशमुख (अध्यक्ष, सनातन धर्म रक्षा संघ), मुकेश जैन (अध्यक्ष, धर्म रक्षक), नितिन त्यागी (हिंदू महासभा), स्वामी बाल योगेश्वर जी महाराज (निरंजनी अखाड़ा), विष्णु गुप्ता (हिंदू सेना), श्रीमती रागिनी तिवारी (जानकी धाम समूह) तथा संत राधाकांत वत्स (निम्बार्क संप्रदाय) सहित अन्य प्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।
ज्ञापन के माध्यम से संगठनों ने संत आसाराम जी बापू के स्वास्थ्य, जेल में चिकित्सा एवं मानवीय सुविधाओं तथा उनकी रिहाई के मामले में शीघ्र न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।