केंद्र का देशव्यापी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान-5 औपचारिक रूप से 6 नवंबर को नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर से लॉन्च किया जाना था। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह कार्यक्रम की अगुवाई कर रहे हैं। पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) के अनुसार अभियान नवंबर भर चलेगा और 2000 से अधिक शहरों-कस्बों को कवर करेगा। मकसद पेंशनरों के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करना आसान बनाना है।
फेस ऑथेंटिकेशन पर जोर-
खास जोर जीवन प्रमाण ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन पर है, जिससे बैंक शाखा में बार-बार जाने की जरूरत घटे। अभियान में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB), UIDAI, MeitY, पेंशनर कल्याण संघ तथा रक्षा, रेल, डाक, दूरसंचार, EPFO और राज्य सरकारें सहयोग कर रही हैं।
वरिष्ठ और महिला पेंशनर-
80 वर्ष से अधिक आयु के सुपर-सीनियर, महिला पेंशनर और स्वास्थ्य संबंधी कठिनाई वाले लाभार्थियों पर विशेष ध्यान है। जो शिविर तक नहीं पहुंच सकते, उनके लिए डोरस्टेप/होम-बेस्ड सेवा की व्यवस्था बताई गई है। लॉन्च पर पिछले अभियान-4 की उपलब्धियों वाला कंपेंडियम और कॉफी टेबल ई-बुक भी जारी होने का कार्यक्रम था।
पेंशनर क्या करे-
पात्र पेंशनर नजदीकी बैंक/IPPB शिविर या आधिकारिक ऐप से जीवन प्रमाण जमा कर सकते हैं। आधार और मोबाइल लिंक सही रखें। धोखाधड़ी कॉल या पैसे मांगने वालों से सावधान रहें—सरकारी प्रक्रिया में जीवन प्रमाण के लिए पैसे नहीं लगते।
क्यों जरूरी-
वार्षिक जीवन प्रमाण न जमा होने पर पेंशन रुक सकती है। डिजिटल अभियान ग्रामीण और बुजुर्ग लाभार्थियों तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास है। राज्यवार शिविर सूची बैंक और डाक विभाग की सूचना से जांचें।
पिछले अभियानों से सबक-
पिछले DLC अभियानों में लाखों पेंशनरों ने डिजिटल तरीके से जीवन प्रमाण जमा किए। फिर भी कुछ क्षेत्रों में नेटवर्क, आधार लिंक और बैंक समन्वय की शिकायतें रही हैं। अभियान-5 में इन सहयोगियों को एक मंच पर लाकर समस्या घटाने की कोशिश है। रेलवे और रक्षा पेंशनर अलग चैनलों से भी प्रमाण दे सकते हैं—अपनी श्रेणी की आधिकारिक गाइड पढ़ें। परिवार के सदस्य बुजुर्गों की मदद करें, लेकिन ओटीपी और बायोमेट्रिक किसी अनजान व्यक्ति को न दें।