जनता की डिमांड - जहांगीर खान का रिमांड !!

जनता की डिमांड - जहांगीर खान का रिमांड !!

पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में खुद को 'पुष्पा' बताकर आतंक का पर्याय बन चुके टीएमसी नेता जहांगीर खान की हेकड़ी अब पूरी तरह हवा हो चुकी है। कभी 5 लाख बाइकों की रैलियों के साथ हुंकार भरने वाले और पुलिस कप्तान जयपाल शर्मा को 'सिंघम' के मुकाबले खुद को 'पुष्पा' बताने वाले इस बाहुबली का अब खुद पुलिस चप्पे-चप्पे पर जुलूस निकाल रही है। नेपाल बॉर्डर से दबोचकर कोलकाता लाए जाने के बाद से 'फाल्टा का पुष्पा' अब फ्लावर से भी गया-गुजा साबित हो रहा है।

कमर में सफेद रस्सा, हाथों में हथकड़ी और जूनियर अफसरों की कमान

वरिष्ठ पत्रकार पंकज प्रसून के मुताबिक, जहांगीर खान का 'पानी उतारने' के लिए पुलिस ने एक खास रणनीति अपनाई है। उसकी बेइज़्ज़ती को और गहरा करने के लिए किसी बड़े अधिकारी के बजाय केवल एक सब-इंस्पेक्टर और जूनियर सिपाहियों की टीम को इस काम में लगाया गया है।

पहले दिन जब जहांगीर को सफेद टी-शर्ट में कोर्ट ले जाया गया, तो स्थानीय जनता ने मांग की कि 'पुष्पा' की कमर में रस्सा नहीं बंधा था। अगले ही दिन पुलिस ने उसकी कमर में मोटा सफेद रस्सा बांधा और वह रस्सा साफ दिखाई दे, इसलिए उसे काली टी-शर्ट पहनाकर पूरे इलाके में पैदल परेड करवाई गई। जो जहांगीर कभी कॉलर खड़े करके घूमता था, वह अब रास्ते भर जनता के सामने हाथ जोड़कर 'तौबा-तौबा' और माफी की भीख मांग रहा है। उधर गुस्साए ग्रामीणों ने उसके आलीशान घर और गाड़ियों को मलबे में तब्दील कर दिया है, जहां से राशन का भारी अवैध भंडार मिला है।

ईवीएम नहीं, 'मिड-डे मील' घोटाले के सबूत जलाने के लिए लगाई गई थी आग!

इस बीच दक्षिण मिदनापुर की एक सरकारी इमारत में लगी आग को लेकर एक बेहद विस्फोटक और सनसनीखेज दावा सामने आया है। दरअसल, कांग्रेस और लेफ्ट समर्थित इकोसिस्टम द्वारा यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि "बीजेपी वालों ने ईवीएम जला दी"। लेकिन बंगाली मीडिया और जमीनी रिपोर्ट्स ने इस झूठ को बेनकाब कर दिया है।

साजिश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग सबसे पहले तीसरी मंजिल पर स्थित जहांगीर खान के दफ्तर में लगी। इसके बाद चौथी, पांचवीं, छठी या सातवीं मंजिल को छोड़कर आग सीधे आठवीं मंजिल पर भड़की। गौरतलब है कि आठवीं मंजिल पर 'मिड-डे मील' (Mid-Day Meal) घोटाले से जुड़ी वो तमाम गोपनीय फाइलें रखी थीं, जिनकी जांच चल रही थी।

अभिषेक बनर्जी को बचाने की आखिरी कोशिश?

विशेषज्ञों का दावा है कि जहांगीर खान पुलिस कस्टडी में सरकारी गवाह बनने को तैयार है। ऐसे में सबूतों (Documents) को नष्ट करने के लिए ही यह आगजनी की गई थी, क्योंकि मिड-डे मील घोटाले के तार सीधे टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व और अभिषेक बनर्जी से जुड़ रहे थे। जहांगीर खान के दफ्तर में भी अभिषेक बनर्जी से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद थे। गवाह (जहांगीर) तो पुलिस के पास सुरक्षित है, लेकिन सबूतों को जलाने की यह अंतिम और हताश कोशिश थी।

डायमंड हार्बर मॉडल ध्वस्त, गुर्गे लौटा रहे हैं वसूली के पैसे

जहांगीर खान की इस दुर्दशा को देखकर टीएमसी के अन्य वसूलीबाजों और गुंडों में इस कदर खौफ बैठ गया है कि उसके दो खास गुर्गे अब खुद गांव-गांव जाकर लोगों से छीने गए और वसूली के पैसे वापस लौटा रहे हैं। वे पैर पकड़कर मिन्नतें कर रहे हैं कि पुलिस की पूछताछ में कोई उनका नाम न ले। डायमंड हार्बर मॉडल का यह सबसे मजबूत किला ढहने के बाद फिरहाद हकीम, महुआ मोइत्रा और सब्यसाची दत्ता जैसे कई टीएमसी दिग्गज अब राजनीतिक पटल से गायब या सरेंडर मोड में नजर आ रहे हैं।