नई दिल्ली: भारत में हर वर्ष 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों Bhagat Singh, Shivaram Rajguru और Sukhdev Thapar के बलिदान की याद में मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1931 में ब्रिटिश हुकूमत ने इन तीनों क्रांतिकारियों को फांसी दी थी।
इतिहास के अनुसार, इन क्रांतिकारियों पर ब्रिटिश अधिकारी John Saunders की हत्या का आरोप लगाया गया था। यह कदम उन्होंने 1928 में Lala Lajpat Rai की मौत का बदला लेने के लिए उठाया था, जिनकी मृत्यु एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में हुई थी। इसके बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया और अंततः उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई।
23 मार्च केवल एक तारीख नहीं, बल्कि देशभक्ति, साहस और बलिदान का प्रतीक है। इस दिन पूरे देश में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके योगदान को याद किया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहां युवाओं को देशभक्ति और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया जाता है।
शहीद दिवस पर कई प्रेरणादायक नारे भी दिए जाते हैं, जैसे “शहीदों का बलिदान, नहीं जाएगा बेकार”, “जब तक सूरज चांद रहेगा, शहीदों का नाम रहेगा” और “वतन पर जो फिदा होगा, अमर वो नौजवान होगा”। ये नारे आज भी युवाओं में जोश और देशभक्ति की भावना जगाते हैं।
इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi सहित कई नेताओं ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनके साहस और समर्पण को नमन किया।
शहीद दिवस हमें यह याद दिलाता है कि आजादी हमें यूं ही नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे अनगिनत बलिदान और संघर्ष छिपे हैं। यह दिन हर भारतीय को देश के प्रति अपने कर्तव्यों का एहसास कराता है।