स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरक्षा, सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण को लेकर समाज से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारों के भरोसे धर्म और संस्कृति की रक्षा संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी आवश्यक है।
सोमवार को गोरक्षा धर्मयात्रा के दौरान गोरखपुर से आजमगढ़ से होते हुए फूलपुर पहुंचे शंकराचार्य का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि गोरक्षा और सनातन मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए निकाली जा रही है।
उन्होंने कहा कि संत समाज और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। साथ ही, प्रदेश में संचालित स्लॉटर हाउसों को लेकर भी चिंता जताई और गो हत्या रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।
कार्यक्रम के दौरान गोसेवा, गोशालाओं के निर्माण और संरक्षण कार्यों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। इसी क्रम में विधानसभा फूलपुर क्षेत्र के योगेश विश्वकर्मा को प्रतिनिधि नियुक्त किया गया।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि मर्यादा, शास्त्र आधारित जीवन और सामाजिक संतुलन का मार्ग है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझें और दिखावे व भ्रम से दूर रहें।