प्रसिद्ध कथावाचक एवं शांतिदूत श्रद्धेय देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा को जीवित रखने के लिए मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिरों से प्राप्त धन का उपयोग केवल सनातन हित और धार्मिक उद्देश्यों के लिए ही होना चाहिए।
महाराजश्री ने जोर देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की नींव गुरुकुल परंपरा में है और देशभर में गुरुकुलों की स्थापना अनिवार्य है। मंदिरों की आय से गुरुकुलम निर्माण की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने एक बार फिर सनातन बोर्ड के गठन की मांग को दोहराया। साथ ही समस्त सनातनी समाज से उन्होंने आह्वान किया कि वे धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे आएं।
महाराजश्री के सानिध्य में नई मुंबई के खारघर स्थित कॉरपोरेट पार्क ग्राउंड में आयोजित शिवमहापुराण कथा का मंगलवार को विधिवत समापन हुआ। बुधवार की रात भव्य भजन-कीर्तन संध्या के माध्यम से वर्ष 2025 को विदाई दी जाएगी तथा मध्यरात्रि में दीप प्रज्वलन कर आध्यात्मिक भाव के साथ वर्ष 2026 का स्वागत किया जाएगा।
शिवभक्ति से होता है समस्त कल्याण
शिवमहापुराण कथा की पूर्णता पर देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करते हैं। उन्होंने शिवभक्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि भगवान शिव अत्यंत करुणामय और भोले हैं, जो अपने भक्तों द्वारा अर्पित हर वस्तु को स्वीकार करते हैं।
महाराजश्री ने कहा कि शिव केवल मनुष्यों और साधु-संतों का ही नहीं, बल्कि असुरों, दानवों, पशु-पक्षियों और समस्त जीव-जंतुओं का भी कल्याण करते हैं। संसार के सभी वर्गों को अपने में समाहित करने की क्षमता केवल भगवान शिव में ही है और शिवभक्ति से ही समग्र उद्धार संभव है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार पर जताई पीड़ा
इस अवसर पर महाराजश्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने दोहराया कि भारत को बांग्लादेश के साथ क्रिकेट संबंध समाप्त करने चाहिए तथा आईपीएल में किसी भी बांग्लादेशी खिलाड़ी को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
अत्याचार के शिकार हिंदुओं की आत्मा की शांति के लिए उन्होंने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ कराया। साथ ही श्रद्धालुओं के कल्याण हेतु शिवमहापुराण की आरती से पूर्व 12 ज्योतिर्लिंगों के मंत्रों का उच्चारण भी करवाया गया।
तुलसी का अद्भुत महत्व
देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने तुलसी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तुलसी को साधारण पौधा समझना भूल है। जिस घर में तुलसी का वास होता है, वहां यमराज भी प्रवेश नहीं कर सकते। उन्होंने श्रद्धालुओं से तुलसी के समक्ष नियमित दीपदान करने और बच्चों को भी यह संस्कार देने का आग्रह किया।
महाराजश्री ने कहा कि कंठ में तुलसी माला धारण करना, भगवान को तुलसी से भोग अर्पित करना तथा विष्णु और श्रीकृष्ण का जप तुलसी से करना अत्यंत पुण्यकारी है। उन्होंने कहा कि जिसके शरीर पर तुलसी का एक कण भी होता है, उसे कोई भी शक्ति हानि नहीं पहुंचा सकती।