यस बैंक

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खत्म होने की कगार से 'टॉप 10' का सफर: 98% गिर चुका था शेयर, जानिए डूबते यस बैंक को कैसे मिला नया जीवन!

नई दिल्ली (The Jagran News):

भारतीय बैंकिंग इतिहास में 'यस बैंक' (Yes Bank) की वापसी किसी चमत्कारिक थ्रिलर से कम नहीं है। 5 मार्च 2020 की वह शाम कोई नहीं भूल सकता, जब रिजर्व बैंक (RBI) ने अचानक बोर्ड भंग कर खाताधारकों के लिए निकासी सीमा ₹50,000 तय कर दी थी। एटीएम पर लंबी कतारें लग गईं, नेट बैंकिंग ठप हो गई और अगस्त 2018 में ₹404 पर बिकने वाला शेयर 98% से ज्यादा टूटकर महज ₹5.55 के कौड़ियों के भाव पर आ गया था। तत्कालीन तिमाही में ₹18,564 करोड़ का रिकॉर्ड घाटा झेलकर बर्बादी के मुहाने पर खड़ा यह बैंक आज देश के शीर्ष 10 निजी बैंकों में मजबूती से सीना ताने खड़ा है।

ऐसे हुआ पतन और घोटाले की शुरुआत:

संस्थापक राणा कपूर के दौर में बैंक ने आंख मूंदकर भारी कर्ज बांटे। 2014 में जो कर्ज ₹55,000 करोड़ था, वह 2019 तक बढ़कर ₹2.41 लाख करोड़ पहुंच गया। आईएलएंडएफएस, अनिल अंबानी समूह, एस्सेल और डीएचएफएल जैसे अत्यधिक कर्जदार समूहों को बिना सोचे-समझे लोन दिए गए, जो बाद में एनपीए (NPA) बन गए। 2016-17 में ₹6,000 करोड़ के फंसे कर्ज छिपाए गए। इसके बाद वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे और राणा कपूर पर ईडी-सीबीआई के कई केस दर्ज हुए।

सरकार और RBI का मास्टरस्ट्रोक:

बैंक को डूबने से बचाने के लिए केंद्र सरकार और आरबीआई ने तुरंत कमान संभाली। एसबीआई के पूर्व सीएफओ प्रशांत कुमार को प्रशासक और फिर एमडी-सीईओ नियुक्त किया गया। एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस और कोटक बैंक ने मिलकर करीब ₹10,350 करोड़ की पूंजी झोंकी। इसके बाद जुलाई 2022 में बैंक ने ₹48,000 करोड़ के डूबे हुए कर्जों (Bad Loans) का पूरा पोर्टफोलियो जेसी फ्लावर्स को बेचकर अपनी बैलेंस शीट साफ कर दी।

आज का मजबूत यस बैंक:

  • विशाल नेटवर्क: देशभर में बैंक की 1,334 शाखाएं और 29,573 से अधिक समर्पित कर्मचारी हैं।

  • कुल संपत्ति: वित्त वर्ष 2026 में बैंक की कुल परिसंपत्तियां ₹4.69 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी हैं।

  • डिपॉजिट में उछाल: मार्च 2020 में ₹1.05 लाख करोड़ का डिपॉजिट अब 2.7 गुना बढ़कर ₹2.85 लाख करोड़ हो चुका है।

  • एनपीए पर नियंत्रण: ग्रॉस एनपीए 16.8% से घटकर 1.6% और नेट एनपीए 5% से घटकर सिर्फ 0.3% रह गया है।

  • मुनाफे में छलांग: 2020 में ₹16,433 करोड़ के नुकसान के मुकाबले बैंक ने 2026 तक आते-आते ₹3,476 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया है।

अगले 4 से 5 वर्षों में 400 से 500 नई शाखाएं खोलने की तैयारी कर रहा यस बैंक आज इस बात की जीती-जागती मिसाल है कि सही नेतृत्व और पारदर्शी अनुशासन से किसी भी डूबते ब्रांड को दोबारा खड़ा किया जा सकता है।