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ग्रामीण भारत की नारी शक्ति का कमाल: 10 साल में खड़े हुए 4.32 लाख से ज्यादा स्टार्टअप, केरल अव्वल; बिहार-झारखंड ने भी रचा इतिहास
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम:
केंद्र सरकार द्वारा 2016 में शुरू किए गए ‘स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम’ (SVEP) ने ग्रामीण भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। इस योजना के 10 साल पूरे होने पर सामने आए जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में 4.32 लाख से अधिक गैर-कृषि ग्रामीण उद्यमों को स्थापित करने में मदद दी जा चुकी है। इन उपक्रमों की सबसे बड़ी ताकत देश की आधी आबादी बनी है—इस पूरे अभियान में 90% से अधिक उद्यमों की कमान महिलाओं के हाथों में है और इनमें से आधे से ज्यादा उद्यम निरंतर मुनाफे में चल रहे हैं।
केरल ने पेश की मिसाल, 'कुदुंबश्री' बना मॉडल:
ग्रामीण उद्यमों को खड़ा करने में केरल देश में शीर्ष पर रहा है, जहां अकेले 62,166 उद्यम शुरू किए गए। केरल में इस मॉडल को जमीनी स्तर पर उतारने का जिम्मा 'कुदुंबश्री' मिशन ने संभाला। कुदुंबश्री की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विग्नेश्वरी वी. के अनुसार, केवल केरल में ही इन उपक्रमों से 84,538 लोग जुड़े हैं और इनमें अधिकांश लोग हर महीने ₹10,000 से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं। यहां सिर्फ 12.5% उद्यम ही ऐसे हैं जो नुकसान में हैं।
कल्लियापूर की क्रिस्टल बाई का उदाहरण इस क्रांति का प्रतीक है—कपड़े के थैले सिलने से शुरुआत करने वाली क्रिस्टल बाई ने कुदुंबश्री की मदद से 'चैतन्य क्लॉथ बैग' नाम से उद्यम खड़ा किया और आज वे हर महीने 3 से 4 लाख रुपये कमा रही हैं।
बिहार और झारखंड का शानदार प्रदर्शन:
केरल के बाद सबसे ज्यादा ग्रामीण उद्यम स्थापित करने में पूर्वी भारत के राज्यों ने बाजी मारी है। बिहार 35,899 उद्यमों के साथ देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि झारखंड 34,481 उद्यमों के साथ तीसरे पायदान पर दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय पहलू यह है कि इन उद्यमों में 86% भागीदारी एससी (SC), एसटी (ST), ओबीसी (OBC) और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रत्येक ब्लॉक को उद्यम विकास के लिए ₹6.50 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जा रही है।